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तीन बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त: असुरक्षित हाइडल टैंक को माना लापरवाही, मुआवजे का आदेश

हाईकोर्ट ने तीन बच्चों की मौत के मामले में राज्य की लापरवाही मानते हुए कहा कि अपर्याप्त सुरक्षा उपाय जीवन के अधिकार का उल्लंघन हैं। - अर्जुन कुमार शर्मा बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य और अन्य

Shivam Y.
तीन बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त: असुरक्षित हाइडल टैंक को माना लापरवाही, मुआवजे का आदेश

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक दुखद मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य प्राधिकरणों की जिम्मेदारी तय की है। अदालत ने माना कि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा उपायों की कमी सीधे तौर पर जीवन के अधिकार का उल्लंघन कर सकती है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2008 की एक घटना से जुड़ा है, जब उधमपुर जिले के एक गांव में रहने वाले याचिकाकर्ता के तीन छोटे बच्चों की डूबने से मौत हो गई थी।

रिकॉर्ड के अनुसार, बच्चे चेनानी हाइडल प्रोजेक्ट के एक फोरबे टैंक में गिर गए थे। याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह टैंक बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के खुला पड़ा था।

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बच्चों की उम्र क्रमशः 8, 6 और 3 वर्ष बताई गई। परिवार ने दावा किया कि टैंक के चारों ओर न तो उचित फेंसिंग थी और न ही कोई चेतावनी संकेत।

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि यह घटना पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है।

उन्होंने बताया,

“इतनी खतरनाक संरचना को बिना मजबूत सुरक्षा उपायों के छोड़ना सीधे तौर पर लोगों की जान को जोखिम में डालना है।”

यह भी बताया गया कि पहले भी इस स्थान पर जानवरों के गिरने की घटनाएं हुई थीं, जिससे खतरे की जानकारी पहले से थी।

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राज्य की ओर से पेश वकील ने लापरवाही से इनकार किया। उनका कहना था कि टैंक के चारों ओर लगभग दो फीट ऊंची दीवार बनी हुई थी और यह पर्याप्त सुरक्षा थी।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि घटना माता-पिता की निगरानी में कमी के कारण हुई और मामला तथ्यों के विवाद से जुड़ा है, इसलिए इसे सिविल कोर्ट में जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कहा कि केवल दो फीट की दीवार किसी भी खतरनाक जलाशय के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं मानी जा सकती।

अदालत ने कहा,

“ऐसी न्यूनतम सुरक्षा व्यवस्था को किसी भी मानक से पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी माना कि जब राज्य की लापरवाही से किसी व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है, तो संवैधानिक अदालतें हस्तक्षेप कर सकती हैं, भले ही सिविल उपाय उपलब्ध हों।

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अदालत ने “res ipsa loquitur” सिद्धांत (अर्थात ‘घटना स्वयं लापरवाही दर्शाती है’) लागू किया।

कोर्ट ने कहा कि तीन छोटे बच्चों का इस तरह डूब जाना अपने आप में यह दिखाता है कि सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं थे।

“ऐसी घटना सामान्य परिस्थितियों में तब नहीं होती जब उचित सुरक्षा व्यवस्था मौजूद हो,” अदालत ने टिप्पणी की।

हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि संबंधित प्राधिकरणों ने अपनी जिम्मेदारी का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया और पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए।

अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला देते हुए मुआवजा देने का निर्देश दिया।

Case Details

Case Title: Arjun Kumar Sharma vs State of J&K and Others

Case Number: OWP No. 554/2009

Judge: Justice Wasim Sadiq Nargal

Decision Date: 24 March 2026

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