सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जब्त संपत्तियों की कार्यवाही सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो सकती क्योंकि आरोपी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु हो गई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्यवाही को कानून के अनुसार मेरिट पर ही तय किया जाना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला बिहार सरकार द्वारा दायर अपील से जुड़ा है, जिसमें एक सरकारी अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप था। आरोप था कि वर्ष 1975 से 2009 के बीच उन्होंने अवैध रूप से संपत्ति बनाई।
जांच के दौरान उनकी पत्नी के नाम पर भी कई संपत्तियां पाई गईं। बाद में अधिकृत अधिकारी ने इन संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया।
हालांकि, हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जब्ती कार्यवाही रद्द कर दी कि मुख्य आरोपी की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए आगे की कार्यवाही जारी नहीं रह सकती।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि “abatement” यानी कार्यवाही का समाप्त होना केवल आपराधिक मामलों में लागू होता है, जब आरोपी की मृत्यु हो जाती है।
कोर्ट ने कहा,
“मृत्यु के कारण आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो सकती है, लेकिन यह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं होती।”
पीठ ने यह भी कहा कि जब्ती की कार्यवाही एक अलग प्रकृति की होती है और इसे केवल आरोपी की मृत्यु के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति, जैसे परिवार के सदस्य के नाम पर है, तो उनके खिलाफ भी कार्यवाही जारी रह सकती है।
कोर्ट ने बिहार स्पेशल कोर्ट्स एक्ट, 2009 का हवाला देते हुए कहा कि:
- जब्ती का आदेश सुनवाई के बाद दिया जाता है
- इसमें संबंधित व्यक्ति को अपनी आय का स्रोत बताने का अवसर दिया जाता है
- कानून में केवल दो ही स्थितियों में संपत्ति लौटाने का प्रावधान है-
- हाई कोर्ट द्वारा आदेश रद्द या संशोधित होना
- विशेष अदालत द्वारा आरोपी का बरी होना
कोर्ट ने कहा कि इन दो स्थितियों के अलावा किसी अन्य आधार पर जब्ती समाप्त नहीं की जा सकती।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि मामला दोबारा हाई कोर्ट में भेजा जाए, जहां इसे मेरिट के आधार पर सुना और तय किया जाए।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
“हाई कोर्ट को अपील का निर्णय कानून के अनुसार गुण-दोष के आधार पर करना होगा।”
दोनों अपीलों को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मामलों को पुनः विचार के लिए हाई कोर्ट को भेज दिया।
Case Title: State of Bihar v. Sudha Singh
Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 7454 of 2025 & connected matter
Judge: Justice Sanjay Karol (with Justice N. Kotiswar Singh)
Decision Date: March 20, 2026










