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प्रक्रियागत खामियों के कारण सुप्रीम कोर्ट ने कथित गिरोह के सरगना के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर रद्द किया।

सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया, यह फैसला सुनाते हुए कि गैंग चार्ट तैयार करने में अनिवार्य प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन नहीं किया गया था, जिससे अभियोजन कानूनी रूप से अस्थिर हो गया। - गब्बर सिंह उर्फ ​​देवेंद्र प्रताप सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य।

Shivam Y.
प्रक्रियागत खामियों के कारण सुप्रीम कोर्ट ने कथित गिरोह के सरगना के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर रद्द  किया।

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि कानून में तय प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को “गैंगस्टर” घोषित नहीं किया जा सकता। अदालत ने उत्तर प्रदेश के बहरेाइच में दर्ज एक FIR को रद्द करते हुए यह स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला गब्बर सिंह उर्फ देवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा दायर अपील से जुड़ा था। उनके खिलाफ 28 मई 2022 को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत FIR दर्ज की गई थी।

पुलिस ने आरोप लगाया था कि आरोपी एक गैंग का सदस्य है, जो जमीन कब्जा, धोखाधड़ी, जबरन वसूली और धमकी जैसी गतिविधियों में शामिल है। हाई कोर्ट ने पहले इस FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने खास तौर पर “गैंग चार्ट” की वैधता पर ध्यान दिया, जो FIR का आधार था।

अदालत ने पाया कि:

  • गैंग चार्ट में आवश्यक अधिकारियों की सिफारिश और हस्ताक्षर नहीं थे।
  • नियमों के अनुसार संयुक्त बैठक (जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के बीच) का कोई रिकॉर्ड नहीं था।

कोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा:

“जब कानून किसी काम को करने का तरीका तय करता है, तो उसे उसी तरीके से करना होगा, अन्यथा नहीं।”

अदालत ने यह भी जोड़ा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता दांव पर हो तो प्रक्रिया में ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि गैंग चार्ट तैयार करने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनुमोदन और स्पष्ट सिफारिश आवश्यक है।

अदालत के अनुसार:

  • स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) की सिफारिश अनिवार्य है
  • अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की स्पष्ट अनुशंसा जरूरी है
  • जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त बैठक के बाद ही अनुमोदन मान्य होगा

इनमें से कोई भी प्रक्रिया दस्तावेज में स्पष्ट नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस गैंग चार्ट के आधार पर FIR दर्ज की गई, वह कानून के अनुसार तैयार नहीं था।

अदालत ने आदेश दिया:

  • बहरेाइच के कोतवाली नगर थाने में दर्ज FIR संख्या 0125/2022 रद्द की जाती है
  • हाई कोर्ट के आदेश भी निरस्त किए जाते हैं

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अन्य आपराधिक मामलों में पुलिस कार्रवाई जारी रह सकती है और यह फैसला केवल प्रक्रिया में हुई कमी के आधार पर है।

Case Title: Gabbar Singh @ Devendra Pratap Singh vs State of U.P. & Ors.

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) Nos. 17929–17930 of 2025

Judge: Justice K. Vinod Chandran & Justice Sanjay Kumar

Decision Date: March 20, 2026

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