जयपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट किया कि केवल व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजा गया नोटिस, कानून के तहत वैध सेवा नहीं माना जा सकता। अदालत के सामने सवाल था क्या ऐसे नोटिस के बाद की गई गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है?
यह मामला के अनुसार एक अवमानना याचिका से जुड़ा था, जिसमें पुलिस अधिकारियों पर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता रवि मीणा को 1 फरवरी 2023 को एंटी करप्शन ब्यूरो, जयपुर द्वारा गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी एक पुराने FIR (नं. 346/2021) के संबंध में हुई थी, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की धाराएं शामिल थीं।
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याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्हें 25 जनवरी 2023 को केवल व्हाट्सऐप के जरिए नोटिस भेजा गया था। उन्होंने जवाब देकर समय मांगा, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बिना उचित प्रक्रिया अपनाए गिरफ्तार कर लिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि:
- धारा 41-A CrPC के तहत नोटिस की विधिवत सेवा जरूरी है।
- व्हाट्सऐप के जरिए भेजा गया संदेश वैध नोटिस नहीं है।
- गिरफ्तारी से पहले कोई ठोस कारण रिकॉर्ड नहीं किया गया।
उनके वकील ने दलील दी,
“यह कार्रवाई व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है।”
राज्य की ओर से कहा गया कि:
- याचिकाकर्ता ने नोटिस का पालन नहीं किया और सहयोग नहीं किया।
- गिरफ्तारी धारा 41(1)(b) CrPC के तहत उचित कारणों के आधार पर की गई।
- गिरफ्तारी से पहले आवश्यक चेकलिस्ट और प्रक्रिया का पालन किया गया।
न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर ने विस्तार से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया, खासकर अरनेश कुमार और सतेंद्र कुमार एंटिल मामलों का।
अदालत ने साफ कहा:
“व्हाट्सऐप या किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा गया नोटिस, CrPC में निर्धारित प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता।”
अदालत ने यह भी माना कि:
- नोटिस की विधिवत सेवा जरूरी है
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है
- गिरफ्तारी केवल कानून के तय तरीके से ही की जा सकती है
एक अहम टिप्पणी में अदालत ने कहा,
“व्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता; इसे केवल विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से ही सीमित किया जा सकता है।”
रिकॉर्ड और तथ्यों की जांच के बाद अदालत ने यह पाया कि:
- व्हाट्सऐप के जरिए भेजा गया नोटिस वैध नहीं था
- धारा 41-A CrPC के तहत आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
हालांकि, अवमानना के प्रश्न पर अदालत ने पूरे तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय दिया (जैसा आदेश में उल्लेखित है)।
Case Details
Case Title: Ravi Meena v. Pushpendra Singh Rathod & Ors.
Case Number: S.B. Civil Contempt Petition No. 507/2023
Judge: Justice Praveer Bhatnagar
Decision Date: 23 March 2026
Counsels:
- Petitioner: Mohit Khandelwal & team
- Respondents: Ghanshyam Singh Rathore & Santosh Singh Shekhawat










