सर्वोच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल 2026 को एक अहम फैसले में तीन दशक से अधिक पुराने भूमि विवाद में 1975 के राजस्व न्यायालय के आदेश को बहाल कर दिया। अदालत ने 31 साल की देरी से दाखिल अपील को अस्वीकार करते हुए कहा कि इतनी लंबी देरी को “उदारता” के आधार पर माफ नहीं किया जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद करीब 158 बीघा भूमि से जुड़ा था। अपीलकर्ता हरि राम ने दावा किया कि भूमि पर उनका ‘खातेदारी’ अधिकार है और यह उनके पिता से उत्तराधिकार में मिला। प्रतिवादियों ने कथित बिक्री विलेख (सेल डीड) के आधार पर कब्ज़े का दावा किया। 16 अगस्त 1975 को राजस्व न्यायालय ने अपीलकर्ता के पक्ष में फैसला दिया।
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करीब 31 साल बाद, 2006 में इस फैसले को चुनौती दी गई। राजस्थान उच्च न्यायालय और राजस्व बोर्ड ने मामले को फिर से सुनवाई के लिए भेज दिया था।
अपीलकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वैभव गग्गर ने कहा कि प्रतिवादी पहले भी मुकदमे में पेश हुए, गवाह पेश किए और अदालत की प्रक्रिया में भाग लिया। बाद में “धोखाधड़ी” का आरोप जोड़ना विश्वसनीय नहीं है।
दूसरी ओर, प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सदान फरासात ने तर्क दिया कि प्रतिवादी निरक्षर और विधवा थीं, उन्हें निष्पक्ष अवसर नहीं मिला, और आदेश धोखे से प्राप्त किया गया।
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पीठ न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा:
“रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि प्रतिवादी मुकदमे में शामिल हुईं, वकील के माध्यम से पेश हुईं और गवाह भी पेश किए। बाद में धोखाधड़ी का आरोप बिना ठोस आधार के जोड़ा गया।”
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अदालत ने यह भी कहा कि जिस बिक्री विलेख के आधार पर दावा किया गया, उसे कभी अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। सर्वोत्तम साक्ष्य छिपाने पर अदालत प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकती है। पीठ ने यह भी कहा कि केवल इसलिए कि डिक्री के बाद तत्काल निष्पादन (execution) नहीं हुआ, यह नहीं माना जा सकता कि कब्ज़ा प्रतिवादियों के पास रहा।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 साल की देरी को “अत्यधिक” बताते हुए हाईकोर्ट और राजस्व बोर्ड के आदेश रद्द कर दिए और 16.08.1975 के राजस्व न्यायालय के आदेश को बहाल कर दिया।
Case Details
Case Title: Hari Ram v. State of Rajasthan & Ors.
Case Number: Civil Appeal arising out of SLP(C) No. 4664 of 2025
Judges: Justice Sanjay Kumar, Justice K. Vinod Chandran
Decision Date: 10 April 2026









