दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी लड़की से दोस्ती या वैलेंटाइन डे का बहाना बनाकर जबरन यौन संबंध बनाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने इस मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला FIR नंबर 53/2025 से जुड़ा है, जो थाना करावल नगर में दर्ज हुआ था। 17 वर्षीय पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी वसीम अख्तर ने 14 फरवरी 2025 को उसे बहाने से एक घर बुलाया। वहां उसने उसकी मांग में सिंदूर भरा और विरोध के बावजूद उसके साथ यौन संबंध बनाए।
पीड़िता के घर लौटने पर उसके भाई ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मेडिकल जांच की गई।
न्यायमूर्ति गिरिश कठपालिया की पीठ ने स्पष्ट कहा,
“सिर्फ इसलिए कि कोई लड़की किसी लड़के की मित्र है या दिन वैलेंटाइन डे है, इससे उसे जबरन यौन संबंध बनाने का कोई अधिकार नहीं मिल जाता।”
अदालत ने यह भी कहा कि बिना सहमति के मांग में सिंदूर भरना भी उचित नहीं ठहराया जा सकता।
आरोपी के वकील ने दलील दी कि पीड़िता बालिग थी और संबंध सहमति से बने थे। साथ ही, घटना वाले दिन को “विशेष दिन” यानी वैलेंटाइन डे बताया गया।
वहीं, राज्य की ओर से पेश वकील ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने स्कूल प्रमाणपत्र के आधार पर पीड़िता की जन्मतिथि 14 जनवरी 2008 बताई, जिससे वह नाबालिग साबित हुई।
अदालत को यह भी बताया गया कि DNA जांच में आरोपी की मौजूदगी की पुष्टि हुई और पीड़िता ने अदालत में उपस्थित होकर भी जमानत का विरोध किया।
अदालत ने कहा कि पीड़िता द्वारा FIR दर्ज कराने से लेकर ट्रायल में बयान और जमानत का विरोध करने तक का रुख स्पष्ट करता है कि घटना उसकी सहमति के खिलाफ थी।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा,
“यह जमानत देने का उपयुक्त मामला नहीं है।”
इसके साथ ही जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
Case Title: Wasim Akhtar v. State (GNCT of Delhi)
Case Number: Bail Appln. 815/2026
Decision Date: March 20, 2026










