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ओबीसी क्रीमी लेयर विवाद: हाई कोर्ट ने वरिष्ठता की मांग खारिज की, नियुक्ति सही ठहराई

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि ओबीसी क्रीमी लेयर तय करने में पति की आय मायने नहीं रखती, और नियुक्ति को सही मानते हुए याचिका खारिज कर दी। - श्रीमती सुनीता यादव बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य

Shivam Y.
ओबीसी क्रीमी लेयर विवाद: हाई कोर्ट ने वरिष्ठता की मांग खारिज की, नियुक्ति सही ठहराई

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि ओबीसी क्रीमी लेयर तय करने में पति की आय या स्वयं की आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने एक सहायक प्रोफेसर (कानून) की नियुक्ति को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला स्म्ट. सुनीता यादव बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2021 में हुई नियुक्ति को चुनौती दी थी।

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (PSC) ने 2017 में सहायक प्रोफेसर (कानून) के पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। ओबीसी (महिला) श्रेणी में दोनों याचिकाकर्ता और प्रतिवादी ने आवेदन किया।

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परीक्षा में प्रतिवादी को 290 अंक मिले, जो कट-ऑफ था, जबकि याचिकाकर्ता को 288 अंक प्राप्त हुए। संशोधित मेरिट सूची में प्रतिवादी को नियुक्ति मिल गई, जबकि याचिकाकर्ता वेटिंग लिस्ट में रहीं। बाद में 2023 में याचिकाकर्ता की भी नियुक्ति हो गई, लेकिन उन्होंने 2021 से वरिष्ठता की मांग की।

याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रतिवादी “क्रीमी लेयर” में आती हैं क्योंकि:

  • उनके पति सिविल जज हैं
  • परिवार की आय 8 लाख से अधिक है

उनका दावा था कि यदि प्रतिवादी को ओबीसी लाभ नहीं मिलता, तो उन्हें 2021 में ही नियुक्ति मिल जाती और उसी आधार पर वरिष्ठता भी मिलती।

प्रतिवादी के वकील ने कहा कि:

  • क्रीमी लेयर तय करने के लिए केवल माता-पिता की आय देखी जाती है
  • पति की आय तब ही मायने रखती है जब वह क्लास-I अधिकारी हो

राज्य की ओर से भी यही तर्क दिया गया कि सिविल जज (क्लास-I नहीं बल्कि क्लास-II पद) होने के कारण पति की आय प्रासंगिक नहीं है।

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न्यायमूर्ति आशीष श्रोत्री की पीठ ने विस्तार से कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया।

कोर्ट ने कहा,

“क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल आर्थिक आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक स्थिति के आधार पर भी किया जाता है।”

एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी में कोर्ट ने स्पष्ट किया:

“कैंडिडेट की अपनी आय या पति की आय (जब तक वह क्लास-I अधिकारी न हो) क्रीमी लेयर निर्धारण में शामिल नहीं होती।”

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कोर्ट ने यह भी पाया कि प्रतिवादी के पिता क्लास-III कर्मचारी थे और माता गृहिणी थीं, इसलिए वे क्रीमी लेयर में नहीं आतीं।

कोर्ट ने माना कि प्रतिवादी को ओबीसी का लाभ सही तरीके से दिया गया था और उनकी नियुक्ति वैध है।

अंततः, अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की वरिष्ठता की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।

Case Details

Case Title: Smt. Sunita Yadav vs State of Madhya Pradesh & Others

Case Number: Writ Petition No. 8426 of 2021

Judge: Justice Ashish Shroti

Decision Date: 2 April 2026

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