दवा उत्पादों के “ELDER” ट्रेडमार्क को लेकर चल रहे विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए पहले दिया गया एक्स-पार्टी अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति संदीप वी. मार्ने ने कहा कि वादी कंपनी ने अदालत से राहत प्राप्त करते समय कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया था। अदालत ने यह भी माना कि यदि इन तथ्यों की जानकारी पहले दी जाती, तो संभवतः अदालत बिना नोटिस के अंतरिम आदेश पारित नहीं करती।
यह आदेश एल्डर प्रोजेक्ट लिमिटेड एल्डर न्यूट्रासिटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड मामले में 9 मार्च 2026 को सुनाया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
मामले की शुरुआत तब हुई जब एल्डर प्रोजेक्ट लिमिटेड ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी कंपनी एल्डर न्यूट्रासिटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड उसकी पंजीकृत ट्रेडमार्क का उल्लंघन कर रही है।
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वादी कंपनी का दावा था कि वह 1992-93 से “ELDER” नाम और उससे जुड़े एक विशेष लोगो का उपयोग दवाइयों, मलहम और अन्य फार्मास्यूटिकल उत्पादों के लिए कर रही है। बाद में उसने 2018 में इस डिवाइस मार्क के लिए आवेदन किया और जून 2024 में उसे ट्रेडमार्क पंजीकरण मिल गया।
वादी ने अदालत से यह भी कहा कि प्रतिवादी ने उसके ट्रेडमार्क से मिलते-जुलते चिन्ह का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जिससे उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो सकता है।
इसी आधार पर 26 सितंबर 2025 को अदालत ने वादी के पक्ष में एक्स-पार्टी एड-इंटरिम इंजंक्शन जारी कर दिया था और प्रतिवादी को “ELDER” शब्द वाले मिलते-जुलते मार्क के उपयोग से रोक दिया गया था।
प्रतिवादी कंपनी ने अदालत से एक्स-पार्टी आदेश हटाने की मांग की।
उसका तर्क था कि वादी ने अदालत को यह नहीं बताया कि:
- Elder Pharmaceuticals Ltd (EPL) नामक कंपनी 1983 से “ELDER” ट्रेडमार्क की वास्तविक मालिक थी।
- वादी कंपनी पहले केवल EPL के लिए कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर के रूप में काम करती थी।
- वादी और प्रतिवादी के निदेशक आपस में भाई-बहन हैं और दोनों का EPL से पुराना संबंध रहा है।
प्रतिवादी ने यह भी बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट पहले कई मामलों में वादी के दावों को खारिज कर चुका है, लेकिन इन आदेशों का उल्लेख वर्तमान मुकदमे में नहीं किया गया।
दूसरी ओर वादी कंपनी ने कहा कि उसका मामला एक अलग डिवाइस मार्क से संबंधित है और उसे उसका वैध ट्रेडमार्क पंजीकरण प्राप्त है। इसलिए प्रतिवादी द्वारा समान शैली और रंग में “ELDER” शब्द का उपयोग उल्लंघन माना जाना चाहिए।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि वादी ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया था।
सबसे महत्वपूर्ण यह था कि Elder Pharmaceuticals Ltd पहले से “ELDER” ट्रेडमार्क की पंजीकृत मालिक थी और वादी कंपनी लंबे समय तक उसके लिए केवल दवाइयाँ बनाती थी।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि वादी के निदेशक ने दिल्ली हाईकोर्ट में पहले दिए गए बयान में स्वीकार किया था कि उनकी कंपनी को “ELDER” ट्रेडमार्क पर कोई अधिकार नहीं है।
न्यायालय ने कहा कि इन तथ्यों को छिपाकर अदालत से अंतरिम राहत प्राप्त करना न्यायिक प्रक्रिया के साथ ईमानदारी के सिद्धांत के खिलाफ है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि एक्स-पार्टी इंजंक्शन मांगने वाले पक्ष का दायित्व होता है कि वह सभी महत्वपूर्ण तथ्य अदालत के सामने रखे।
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इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने:
- 26 सितंबर 2025 को दिया गया एक्स-पार्टी अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश रद्द कर दिया
- यह माना कि वादी द्वारा तथ्य छिपाए गए थे
- और कहा कि ऐसे मामलों में अदालत को सावधानी बरतनी चाहिए
हालांकि मुकदमे की अंतिम सुनवाई अभी बाकी है और ट्रेडमार्क विवाद का अंतिम फैसला बाद में किया जाएगा।
Case Details
Case Title: Elder Prroject Limited v. Elder Neutraciticals Private Limited
Case Number: Interim Application (L) No. 35091 of 2025 in Commercial IP Suit (L) No. 27106 of 2025
Date of Decision: 9 March 2026










