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दिल्ली हाईकोर्ट से रवजीत सिंह को अग्रिम जमानत, कोर्ट बोली-"स्मार्ट जवाब देना जांच में असहयोग नहीं"

रवजीत सिंह बनाम केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI भ्रष्टाचार मामले में रवजीत सिंह को अग्रिम जमानत दी, कहा-स्मार्ट जवाब देना जांच में असहयोग नहीं माना जा सकता।

Vivek G.
दिल्ली हाईकोर्ट से रवजीत सिंह को अग्रिम जमानत, कोर्ट बोली-"स्मार्ट जवाब देना जांच में असहयोग नहीं"

दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में आरोपी रवजीत सिंह को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि आरोपी पूछताछ में “स्मार्ट” तरीके से जवाब देता है, यह नहीं कहा जा सकता कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा।

न्यायमूर्ति गिरिश कठपालिया की पीठ ने यह आदेश केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज मामले में सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 19 दिसंबर 2025 को दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत जांच चल रही है।

अभियोजन के अनुसार, मुख्य आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा पर रक्षा क्षेत्र से जुड़ी निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कथित रूप से भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

जांच एजेंसी का कहना है कि रवजीत सिंह दुबई स्थित कंपनी एम/एस डी.पी. वर्ल्ड के भारत में संचालन से जुड़े थे और उनका संपर्क लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा से था। आरोप है कि सरकारी मंत्रालयों और विभागों से अनुचित लाभ हासिल करने के लिए यह संपर्क बनाया गया था।

सीबीआई के मुताबिक, इसी सिलसिले में अवैध लाभ के बदले विदेश मंत्रालय से कुछ अनुमोदन हासिल कराने की साजिश रची गई और लगभग 3 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा को दी गई, जिसे बाद में सीबीआई की छापेमारी में बरामद किया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह भी बताया गया कि जांच एजेंसी द्वारा एकत्र किए गए प्रमुख सबूत व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट के रूप में हैं।

अदालत ने इस पहलू का भी संज्ञान लिया कि ये चैट मूल रिकॉर्ड के रूप में नहीं बल्कि स्क्रीनशॉट के रूप में पेश किए गए हैं।

सीबीआई ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और अगर उन्हें अग्रिम जमानत दी गई तो पूछताछ में सहयोग मिलने की संभावना कम होगी।

हालांकि अदालत ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना।

पीठ ने कहा, “केवल इस आधार पर कि आरोपी पूछताछ में स्मार्ट तरीके से जवाब देता है, यह नहीं कहा जा सकता कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा। किसी व्यक्ति पर यह दायित्व नहीं है कि वह स्मार्ट न हो; जांचकर्ता को ही आवश्यक जानकारी निकालने के लिए अधिक कुशल होना होगा।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि जांच एजेंसी ने यह आशंका नहीं जताई कि आरोपी जमानत मिलने के बाद जांच में शामिल होने से बचेंगे या देश से फरार हो सकते हैं।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि इस मामले के मुख्य आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

अदालत ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा और कहा कि ऐसे में समानता के सिद्धांत के आधार पर रवजीत सिंह की याचिका पर विचार किया जाना उचित है।

सभी परिस्थितियों को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने रवजीत सिंह की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

अदालत ने निर्देश दिया कि यदि उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें 50,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानती पर रिहा किया जाएगा।

साथ ही यह भी शर्त लगाई गई कि आरोपी जांच अधिकारी द्वारा लिखित निर्देश मिलने पर जांच में शामिल होंगे और किसी भी तरह से सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

Case Title: Ravjeet Singh vs Central Bureau of Investigation

Case No.: BAIL APPLN. 328/2026

Decision Date: 12 March 2026

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