इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे अंगद यादव की पैरोल और अल्पकालिक जमानत की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का मामला पैरोल देने के लिए उपयुक्त नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
अंगद यादव को वर्ष 1995 के एक हत्या मामले में दोषी ठहराया गया था और उन्हें धारा 302/34 आईपीसी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने 2021 में बरकरार रखा था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी 2022 में पुष्टि कर दी।
इसके बाद वर्ष 2025 में उन्होंने राज्य सरकार के समक्ष आवेदन देकर स्वास्थ्य, बढ़ती उम्र और मानवीय आधार पर दो माह की पैरोल मांगी थी, जिसे 4 जून 2025 को खारिज कर दिया गया।
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बाद में उन्होंने अपने बच्चों के विवाह की व्यवस्था और कृषि कार्य के लिए भी पैरोल मांगी, लेकिन यह आवेदन भी 27 अक्टूबर 2025 को अस्वीकार कर दिया गया।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि अंगद यादव लगभग 71 वर्ष के हैं और कई बीमारियों से ग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि मानवीय आधार पर पैरोल दी जा सकती है, विशेषकर जब व्यक्ति वृद्ध और अस्वस्थ हो।
यह भी तर्क दिया गया कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर पैरोल से इनकार करना उचित नहीं है और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी विशेष परिस्थितियों में राहत देने की बात कही गई है।
राज्य की ओर से पेश वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और कुछ अभी भी लंबित हैं।
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राज्य ने यह भी कहा कि बच्चों की शादी की तारीख तय नहीं है और उत्तर प्रदेश (बंदियों के दण्डादेश का निलंबन) नियमावली, 2007 के तहत ऐसी स्थिति में पैरोल का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही, कृषि कार्य के लिए परिवार के अन्य सदस्य उपलब्ध हैं।
कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है। कोर्ट ने कहा,
“रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता का स्वास्थ्य सामान्य है, इसलिए इस आधार पर कोई राहत नहीं दी जा सकती।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमावली 2007 के तहत बच्चों के विवाह की व्यवस्था के लिए पैरोल देने का कोई प्रावधान नहीं है।
कृषि कार्य के संबंध में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के वयस्क बेटे मौजूद हैं, जो यह कार्य संभाल सकते हैं, इसलिए “कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं” वाली शर्त पूरी नहीं होती।
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इसके अलावा, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आपराधिक इतिहास और लंबित मामलों को भी महत्वपूर्ण माना और सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत का उल्लेख किया जिसमें पैरोल देते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई गई है।
सभी तथ्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा पैरोल आवेदन खारिज करने में कोई त्रुटि नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा,
“यह पैरोल देने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है।”
इसी के साथ अंगद यादव द्वारा दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
Case Title: Angad Yadav vs State of U.P. & Others
Case Number: Criminal Misc. Writ Petition No. 848 of 2026 (with connected matters)
Judge: Justice Rajesh Singh Chauhan & Justice Rajeev Bharti
Decision Date: March 19, 2026









