मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में निजी रिक्रिएशन क्लब को दिए गए FL2 (शराब परोसने) लाइसेंस को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि लाइसेंस जारी करते समय स्थानीय जरूरतों और जनहित की अनदेखी नहीं की जा सकती।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला दो जनहित याचिकाओं से जुड़ा था, जिनमें थंडलाई गांव (मदुरै जिला) में एक रिक्रिएशन क्लब को दिए गए FL2 लाइसेंस को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि:
- क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से कोई शराब दुकान नहीं है
- ग्राम पंचायतों ने लिखित प्रस्ताव पारित कर शराब बिक्री का विरोध किया है
- संबंधित क्लब ने नियमों से बचने के लिए नाम बदलकर लाइसेंस प्राप्त किया
उन्होंने आरोप लगाया कि लाइसेंस जारी करते समय नियमों और स्थानीय विरोध को नजरअंदाज किया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि:
- क्लब तीन वर्ष पुराना नहीं है, जबकि नियमों के अनुसार यह आवश्यक है
- पुलिस द्वारा दिया गया “नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” बिना उचित जांच के जारी किया गया
- ग्राम पंचायत के स्पष्ट विरोध के बावजूद लाइसेंस दिया गया
अदालत में यह भी कहा गया कि यह कदम स्थानीय संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था पर असर डाल सकता है।
सरकारी पक्ष ने कहा कि:
- लाइसेंस निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए दिया गया
- क्लब का मूल पंजीकरण वर्ष 2009 का है
- प्रारंभिक जांच में कोई सार्वजनिक आपत्ति सामने नहीं आई
क्लब की ओर से यह भी कहा गया कि याचिकाएं तथ्यात्मक विवाद उठाती हैं, जिनकी जांच रिट क्षेत्राधिकार में संभव नहीं है।
पीठ ने रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद पाया कि:
“लाइसेंस देने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि स्थानीय जरूरतें इसे उचित ठहराती हैं और जनहित प्रभावित न हो।”
अदालत ने स्पष्ट किया कि:
- ग्राम पंचायत और ग्राम सभा संवैधानिक संस्थाएं हैं
- उनके प्रस्ताव स्थानीय जनता की इच्छा को दर्शाते हैं
- इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
पीठ ने यह भी कहा:
“जब गांवों ने शराब बिक्री का विरोध किया है, तब लाइसेंस जारी करना जनहित के विपरीत है।”
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अदालत ने तमिलनाडु लिकर लाइसेंस नियमों के तहत आवश्यक शर्तों पर जोर दिया:
- स्थानीय आवश्यकता का आकलन
- जनहित पर प्रभाव
- क्लब का निर्धारित अवधि तक संचालन
न्यायालय ने पाया कि इन सभी पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि लाइसेंस जारी करते समय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
अंततः, मद्रास उच्च न्यायालय ने:
- 07.10.2025 को जारी FL2 लाइसेंस को रद्द कर दिया
- दोनों याचिकाओं को स्वीकार कर लिया
Case Details
Case Title: T. Sathiskumar vs State Government of Tamil Nadu & Ors. (Connected matters)
Case Number: WP(MD) Nos. 31562 & 31655 of 2025
Judge: Justice N. Sathish Kumar & Justice M. Jothiraman










