मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की चेन्नई स्थित संपत्ति से जुड़े विवाद में चल रही ट्रायल कार्यवाही पर अंतरिम रोक को आगे बढ़ा दिया।
न्यायमूर्ति टी.वी. थमिलसेल्वी ने बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर द्वारा दायर सिविल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को 26 मार्च 2026 को अंतिम निपटारे के लिए सूचीबद्ध किया।
यह मामला चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर स्थित 4.7 एकड़ भूमि से संबंधित है, जिसे वर्ष 1988 में खरीदा गया था।
यह विवाद एम.सी. शिवकामी, उनके भाई एम.सी. नटराजन और उनकी मां चंद्रभानु द्वारा दायर सिविल सूट से उत्पन्न हुआ है।
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याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह संपत्ति उनके पैतृक दादा की थी और श्रीदेवी तथा उनकी बहन द्वारा किए गए चार बिक्री विलेख (sale deeds) धोखाधड़ीपूर्ण हैं।
उन्होंने अदालत से इन विलेखों को शून्य घोषित करने और संपत्ति में हिस्सेदारी देने की मांग की।
बोनी कपूर और उनके परिवार ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 7 नियम 11 और धारा 151 के तहत वाद (plaint) को खारिज करने की मांग की थी।
उनका तर्क था कि वाद कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और 1988 के दस्तावेजों को 37 वर्षों बाद चुनौती देना समय-सीमा (limitation) के विरुद्ध है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चंद्रभानु का विवाह पहले विवाह के दौरान हुआ था, जो कानूनन शून्य (void) है, और इस तथ्य को छुपाकर अदालत को गुमराह किया गया।
वहीं, वादियों ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ये सभी विवादित तथ्य हैं, जिनका निर्णय केवल ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है।
चेंगलपट्टू की ट्रायल कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि वाद को केवल सीमित आधारों पर ही खारिज किया जा सकता है, जैसे कि कारण-ए-कार्य (cause of action) का अभाव या वाद का कानून द्वारा वर्जित होना।
अदालत ने पाया कि वादियों ने प्रथम दृष्टया पर्याप्त कारण-ए-कार्य दर्शाया है और समय-सीमा का मुद्दा विस्तृत सुनवाई का विषय है।
इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने वाद खारिज करने से इनकार कर दिया था।
मद्रास हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक को जारी रखा।
साथ ही, मामले को 26 मार्च 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।










