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RERA रिफंड आदेश की अंतिम वैधता बरकरार: बॉम्बे हाई कोर्ट ने विलंबित चुनौती पर 2019 के फैसले को दोबारा खोलने से इनकार कर दिया

बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरईआरए रिफंड के अंतिम आदेश को दोबारा खोलने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि विलंबित याचिकाएं निपटाए गए मामलों को पलटने के लिए बाद के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भरोसा नहीं कर सकती हैं। - मार्वल लैंडमार्क्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य।

Shivam Y.
RERA रिफंड आदेश की अंतिम वैधता बरकरार: बॉम्बे हाई कोर्ट ने विलंबित चुनौती पर 2019 के फैसले को दोबारा खोलने से इनकार कर दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया कि एक बार रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) का आदेश अंतिम हो जाए, तो बाद में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर उसे दोबारा नहीं खोला जा सकता खासकर जब याचिकाकर्ता ने समय पर चुनौती नहीं दी हो।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला मार्वल लैंडमार्क्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य। से जुड़ा है, जिसमें एक फ्लैट खरीदार को ₹1.35 करोड़ से अधिक राशि ब्याज सहित वापस करने का आदेश 2019 में RERA के अधिनिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) ने दिया था।

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कंपनी ने इस आदेश को निर्धारित समय के भीतर अपील में चुनौती नहीं दी। बाद में 2021 में, आदेश का पालन न करने पर रिकवरी वारंट भी जारी हुआ।

2021 में सुप्रीम कोर्ट के न्यूटेक फैसले के बाद कंपनी ने दावा किया कि अधिनिर्णायक अधिकारी को रिफंड का आदेश देने का अधिकार ही नहीं था, इसलिए पुराना आदेश “अमान्य” (non est) हो गया है।

याचिकाकर्ता कंपनी ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार केवल RERA अथॉरिटी ही रिफंड का आदेश दे सकती है, न कि अधिनिर्णायक अधिकारी।

वहीं, फ्लैट खरीदार की ओर से कहा गया कि आदेश उस समय की वैध प्रक्रिया के तहत पारित हुआ था और कंपनी ने समय पर अपील नहीं की, इसलिए आदेश अंतिम हो चुका है।

यह भी कहा गया कि कई साल बाद याचिका दायर करना “देरी और लापरवाही” (delay and laches) का स्पष्ट उदाहरण है।

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न्यायमूर्ति सोमसेखर सुंदरासन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का न्यूटेक फैसला इस मामले पर सीधे लागू नहीं होता।

अदालत ने स्पष्ट किया:

“Newtech का निर्णय उस प्रश्न पर नहीं था कि अधिनिर्णायक अधिकारी को रिफंड का अधिकार कभी नहीं दिया जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि RERA कानून के तहत कुछ शक्तियाँ अधिकारियों को सौंपना (delegation) संभव है, और यह स्वतः अवैध नहीं माना जा सकता।

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सबसे महत्वपूर्ण, अदालत ने देरी पर कड़ा रुख अपनाया:

“एक बार आदेश अंतिम हो जाए, तो बाद में आए निर्णय के आधार पर बंद मामलों को फिर से नहीं खोला जा सकता।”

हाईकोर्ट ने पाया कि:

  • 2019 का आदेश अंतिम हो चुका था
  • याचिका लगभग तीन साल की देरी से दायर हुई
  • याचिकाकर्ता ने समय पर अपील नहीं की

इन सभी कारणों से अदालत ने अपने विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

अंततः, याचिका खारिज कर दी गई और RERA का रिफंड आदेश बरकरार रखा गया।

Case Details

Case Title: Marvel Landmarks Pvt. Ltd. v. State of Maharashtra & Ors.

Case Number: Writ Petition No. 12121 of 2024

Judge: Justice Somasekhar Sundaresan

Decision Date: 7 April 2026

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