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मद्रास हाईकोर्ट ने दिव्यांग इंजीनियर के पक्ष में दिया बड़ा फैसला, पुडुचेरी सरकार को नेटिविटी सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश

ई. हरिहरन बनाम भारत संघ और अन्य, मद्रास हाईकोर्ट ने दिव्यांग इंजीनियर के मामले में पुडुचेरी सरकार को नेटिविटी सर्टिफिकेट जारी करने और मेडिकल फिटनेस की नई जांच कराने का आदेश दिया।

Vivek G.
मद्रास हाईकोर्ट ने दिव्यांग इंजीनियर के पक्ष में दिया बड़ा फैसला, पुडुचेरी सरकार को नेटिविटी सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश

मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को केवल इस आधार पर नेटिविटी सर्टिफिकेट से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह कुछ समय के लिए अपने मूल स्थान से बाहर रह रहा था। अदालत ने पुडुचेरी प्रशासन को निर्देश दिया कि दिव्यांग अभ्यर्थी को तुरंत नेटिविटी सर्टिफिकेट जारी किया जाए और उसके मेडिकल फिटनेस का नए सिरे से परीक्षण कराया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ई. हरिहरन, जो 40% शारीरिक दिव्यांगता से पीड़ित हैं, ने पुडुचेरी के बिजली विभाग में जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) पद के लिए आवेदन किया था। लिखित परीक्षा में उन्होंने 65.50 अंक प्राप्त किए और उन्हें ओबीसी श्रेणी में अस्थायी रूप से चयनित भी किया गया।

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हालांकि, नियुक्ति से पहले आवश्यक नेटिविटी और कम्युनिटी सर्टिफिकेट जारी नहीं किए गए। प्रशासन ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि याचिकाकर्ता कुछ समय के लिए तमिलनाडु के मायिलादुथुरै जिले के एक गांव में रह रहे थे।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनका जन्म और शिक्षा पूरी तरह पुडुचेरी में हुई है। कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी मां की मृत्यु हो गई और पिता भी बीमार हो गए, जिसके कारण उन्हें अस्थायी रूप से अपनी बहन के पास रहना पड़ा।

याचिकाकर्ता के तर्क

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि सरकार के G.O. Ms. No.48 (12.12.2002) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का जन्म पुडुचेरी में हुआ है तो वह नेटिविटी सर्टिफिकेट का हकदार है, भले ही वह कुछ समय के लिए बाहर रहा हो।

अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता के पास आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें उनका पता पुडुचेरी का ही दर्ज है।

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अदालत की टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने कहा कि प्रशासन ने मामले में यांत्रिक और असंवेदनशील तरीके से फैसला लिया

पीठ ने कहा: “केवल इसलिए कि कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए किसी अन्य स्थान पर रह रहा था, उसे जन्म आधारित नेटिविटी सर्टिफिकेट से वंचित नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के मामलों में अधिकारियों को अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

मेडिकल फिटनेस के मुद्दे पर अदालत ने पाया कि मेडिकल बोर्ड ने याचिकाकर्ता की कार्य क्षमता का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं किया। अदालत ने ध्यान दिलाया कि याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है और चार साल तक निजी क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर के रूप में काम भी किया है

पीठ ने टिप्पणी की:“दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार दया का विषय नहीं बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समानता और गरिमा के अधिकार का हिस्सा हैं।”

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अदालत का निर्णय

मद्रास हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए निम्न निर्देश जारी किए:

  1. प्रशासन द्वारा नेटिविटी सर्टिफिकेट देने से इनकार को अवैध घोषित किया गया और तुरंत सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया गया।
  2. याचिकाकर्ता की मेडिकल फिटनेस की जांच के लिए नई मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया गया, जिसमें न्यूरोलॉजिस्ट और विभागीय विशेषज्ञ शामिल होंगे।
  3. यदि मेडिकल बोर्ड उन्हें फिट घोषित करता है, तो उन्हें जूनियर इंजीनियर पद पर नियुक्ति दी जाएगी।
  4. राज्य सरकार को याचिकाकर्ता को ₹50,000 लागत के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया गया।
  5. पुडुचेरी के मुख्य सचिव को दो महीने के भीतर अधिकारियों के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण (sensitisation programme) और मानक प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया गया।

Case Title: E. Hariharan v. Union of India & Others

Case No.: W.P. No. 26303 of 2025

Decision Date: 05 March 2026

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