भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने नंदी इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (एनआईसीई) और जमीन-जायदाद के बीच चल रहे लंबे विवाद में अहम फैसला सुनाया। केस कॉलेज की एक बेशकीमती ज़मीन के मुआवज़े की दर तय करने से पहले, जिस पर दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला कर्नाटक के केंगेरी गांव की एक ज़मीन से संबंधित है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 6 एकड़ 10 गुंटा था। इसमें से 3 एकड़ 6 गुंटा ज़मीन विवाद के केंद्र में रही।
ट्रायल कोर्ट ने इस ज़मीन का मूल्य ₹1,000 प्रति वर्ग फुट तय किया था। हालांकि, बाद में Karnataka High Court ने इस दर को घटाकर ₹500 प्रति वर्ग फुट कर दिया।
इस फैसले से दोनों पक्ष संतुष्ट नहीं थे।
- NICE ने इसे और कम करने की मांग की
- जबकि ज़मीन मालिकों ने दर बढ़ाने की अपील की
इसी के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
डायनासोर के दौरान अरविंद कुमार की पृष्टि ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य और पहले के साक्ष्य का विश्लेषण किया।
अदालत ने कहा कि मुआवज़ा तय करते समय ज़मीन की लोकेशन, आसपास का विकास और बाज़ार दर जैसे सभी पहलुओं को संतुलित तरीके से देखना जरूरी है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि:
“मूल्य निर्धारण किसी एक पक्ष के हित में नहीं, बल्कि न्यायसंगत और यथार्थ के अनुरूप होना चाहिए।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि हाई कोर्ट द्वारा की गई कमी पूरी तरह मनमानी नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों के आधार पर की गई थी।
मुख्य सवाल यह था कि:
- क्या ₹500 प्रति वर्ग फुट की दर उचित है?
- या फिर इसे बढ़ाया या घटाया जाना चाहिए?
दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष में बाज़ार दर और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए।
अदालत ने पाया कि:
- ट्रायल कोर्ट द्वारा तय ₹1,000 प्रति वर्ग फुट की दर अधिक प्रतीत होती है
- वहीं ₹500 प्रति वर्ग फुट की दर, उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार, संतुलित आकलन है
पीठ ने कहा कि मूल्य निर्धारण में अत्यधिक वृद्धि या कमी, दोनों ही न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।
अंततः सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ₹500 प्रति वर्ग फुट की दर उचित है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। दोनों अपीलों को इसी आधार पर निपटा दिया गया।
Case Details
Case Title: Nandi Infrastructure Corridor Enterprises Ltd. & Anr. vs B. Gurappa Naidu & Ors.
Case Number: Civil Appeal No. 1388 of 2013 (with Civil Appeal No. 1354 of 2013)
Judges: Justice Aravind Kumar and Justice N.V. Anjaria
Decision Date: April 30, 2026











