मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किया, बिना वैकल्पिक उपाय अपनाए FIR दर्ज कराने के निर्देश पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैकल्पिक उपाय अपनाए FIR दर्ज कराने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए FIR भी खारिज कर दी। - सुजल विश्वास अत्तावर एवं अन्य। बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य।

Rajan Prajapati
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किया, बिना वैकल्पिक उपाय अपनाए FIR दर्ज कराने के निर्देश पर उठाए सवाल

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने साफ कहा कि कानून में उपलब्ध वैकल्पिक उपायों को अपनाए बिना सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना उचित नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला सुजल विश्वास अत्तावर और अन्य। बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य। से देखें. विवाद एक संपत्ति और संबंधित व्यवसायिक लेन-डेन से उत्पन्न हुआ था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2025 को एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए पुलिस को निर्देश दिया था कि कंपनी की डायरेक्टर का बयान दर्ज किया जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। इसी के आधार पर संबंधित FIR दर्ज की गई थी।

इस आदेश को चुनौती देते हुए अपीलकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य कानूनी प्रश्न पर ध्यान केंद्रित किया-क्या संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट सीधे FIR दर्ज करने का आदेश दे सकता है, जब आवेदक ने पहले से उपलब्ध वैकल्पिक उपायों का इस्तेमाल नहीं किया हो?

पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून में FIR दर्ज कराने के लिए एक क्रमबद्ध प्रक्रिया मौजूद है, जिसमें पहले संबंधित पुलिस अधिकारियों और फिर मजिस्ट्रेट के पास जाने का विकल्प होता है।

अदालत ने कहा,

“जब प्रभावी और पर्याप्त वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हों, तो हाईकोर्ट के असाधारण अधिकार क्षेत्र का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।”

पीठ ने यह भी माना कि याचिका समय से पहले (premature) दायर की गई थी, क्योंकि आवेदक ने कानूनी प्रक्रिया के आवश्यक चरणों का पालन नहीं किया था।

Read also:- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जब्त वाहन मामला पलटा: आदेश रद्द, याचिकाकर्ता को मुआवज़ा देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय न्याय प्रणाली में वैकल्पिक उपायों का सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यक्ति सीधे हाईकोर्ट चला जाता है, तो यह न्यायिक प्रक्रिया के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट को संयम बरतना चाहिए और तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब अन्य उपाय पूरी तरह विफल हो चुके हों।

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को रद्द करते हुए उसके आधार पर दर्ज FIR को भी खारिज कर दिया।

पीठ ने आदेश में कहा,

“हम impugned आदेश को निरस्त करते हैं और उसके तहत दर्ज FIR को भी रद्द करते हैं।”

साथ ही, अदालत ने पक्षकारों को यह स्वतंत्रता दी कि वे कानून के तहत उपलब्ध वैकल्पिक उपायों का सहारा ले सकते हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले को मामले के तथ्यों या किसी संभावित अपराध पर राय के रूप में नहीं देखा जाएगा।

Case Details

Case Title: Sujal Vishwas Attavar & Anr. vs State of Maharashtra & Ors.

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No.1088/2026 & 1133/2026

Judge: Justice Sanjay Karol and Justice Augustine George Masih

Decision Date: May 4, 2026

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories