दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश में एक छात्र को JEE (Advanced) 2026 परीक्षा में प्रोविजनल (अस्थायी) रूप से बैठने की अनुमति दे दी है। मामला सीट अलॉटमेंट नियमों और पात्रता (eligibility) से जुड़ा था।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता (petitioner) ने 2025 में JEE (Mains) और JEE (Advanced) परीक्षा दी थी और काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लिया। उसने JoSAA पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया, ₹15,000 सीट स्वीकृति शुल्क जमा किया और दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की।
काउंसलिंग के दौरान उसे पहले IIT (ISM) धनबाद में सीट मिली और बाद में छठे राउंड में IIT गुवाहाटी में Engineering Physics ब्रांच आवंटित हुई। इस दौरान “withdraw” विकल्प उपलब्ध नहीं था और सीट स्वतः स्वीकार मानी गई।
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हालांकि, छात्र ने बाद में IIT गुवाहाटी में दाखिला नहीं लिया और ईमेल के माध्यम से अपनी असहमति जताई। इसके बाद उसने JEE Advanced 2026 में बैठने की अनुमति मांगी, लेकिन IIT रुड़की ने उसे अयोग्य (ineligible) घोषित कर दिया।
मुख्य प्रश्न यह था कि क्या छात्र, जिसने सीट अलॉटमेंट के बाद संस्थान में रिपोर्ट नहीं किया, JEE Advanced 2026 के लिए पात्र माना जा सकता है या नहीं।
JEE Advanced के नियम (Criterion A5) के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार ने IIT में सीट स्वीकार की है, तो वह अगली बार परीक्षा देने के लिए अयोग्य हो सकता है।
कोर्ट ने पाया कि छात्र ने भले ही ऑनलाइन रिपोर्टिंग की हो, लेकिन अंतिम प्रवेश (final admission) मूल दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन (physical verification) पर निर्भर था, जो इस मामले में नहीं हुआ।
न्यायमूर्ति जस्मीत सिंह ने कहा:
“पेटिशनर के पक्ष में प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनता है और संतुलन (balance of convenience) भी उसी के पक्ष में है।”
कोर्ट ने यह भी माना कि यदि छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई, तो उसे अपूरणीय क्षति (irreparable loss) होगी, क्योंकि यह उसका अंतिम प्रयास हो सकता है।
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साथ ही, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि यह आदेश “सिर्फ सहानुभूति (sympathy)” के आधार पर नहीं दिया जा रहा है, बल्कि मामले के तथ्यों पर आधारित है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि:
“पेटिशनर को JEE (Advanced) 2026 परीक्षा में 17.05.2026 को आयोजित होने वाली परीक्षा में प्रोविजनल रूप से बैठने की अनुमति दी जाती है।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अनुमति अंतिम निर्णय के अधीन होगी। यदि बाद में याचिका खारिज होती है, तो परीक्षा परिणाम को अमान्य (null and void) घोषित किया जा सकता है।
Case Details
Case Title: Shreyansh Jarwal vs Joint Seat Allocation Authority (JoSAA) & Ors.
Case Number: W.P.(C) 5770/2026
Judge: Justice Jasmeet Singh
Decision Date: 28 April 2026










