सिक्किम हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक दिव्यांग महिला से दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पीड़िता की गवाही को केवल उसकी अभिव्यक्ति की सीमाओं के आधार पर कमजोर नहीं माना जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह अपील आरोपी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(l) के तहत दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी।
मामले में पीड़िता एक 70% मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग महिला है, जिसे सेरेब्रल पाल्सी भी है। घटना 2 सितंबर 2022 की बताई गई, जब पीड़िता के साथ कथित तौर पर यौन अपराध हुआ।
डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि दिव्यांग पीड़ितों की गवाही को सामान्य मानकों से नहीं परखा जाना चाहिए।
अदालत ने कहा,
“दिव्यांग गवाह की गवाही को केवल इसलिए कमतर नहीं आंका जा सकता क्योंकि वह अलग तरीके से अपनी बात रखती है।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता द्वारा आरोपी का नाम न लेना या सीधे पहचान न कर पाना, अपने आप में अभियोजन के मामले को कमजोर नहीं करता, यदि अन्य साक्ष्य उसका समर्थन करते हों।
अदालत ने मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना। डॉक्टर की रिपोर्ट में चोटों और शारीरिक स्थिति से यौन शोषण की पुष्टि हुई।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी पीड़िता के नमूनों में मानव रक्त पाया गया, जिससे अभियोजन का मामला मजबूत हुआ।
इसके अलावा, प्रत्यक्षदर्शी गवाह और परिवार के सदस्यों की गवाही से आरोपी की मौजूदगी और पहचान स्थापित हुई।
सभी साक्ष्यों और गवाहियों का मूल्यांकन करने के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन का मामला विश्वसनीय है और आरोपी की पहचान तथा घटना में उसकी भूमिका स्पष्ट रूप से साबित होती है।
कोर्ट ने कहा,
“सिर्फ इस कारण कि पीड़िता आरोपी का नाम नहीं ले सकी, सच्चाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
अंततः हाईकोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि और 10 वर्ष की सजा को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। साथ ही, पीड़िता के लिए 4 लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश भी बरकरार रखी गई।
Case Details
Case Title: Rinzing Sherpa vs State of Sikkim
Case Number: CRL. A. No. 9 of 2024
Judge: Justice Meenakshi Madan Rai and Justice Bhaskar Raj Pradhan
Decision Date: 29 April 2026










