नई दिल्ली की साकेत अदालत ने सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणियों के मामले में अहम आदेश देते हुए पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला संज्ञेय अपराध का बनता है और विस्तृत जांच आवश्यक है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मनीषा पांडे और अन्य बनाम अभिजीत अय्यर मित्रा से जुड़ा है, जिसमें शिकायतकर्ता मनीषा पांडे सहित छह पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “X” पर अपमानजनक और यौन संकेतों वाली टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।
शिकायत में कहा गया कि आरोपित ने कई पोस्ट में पत्रकारों को अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया। रिकॉर्ड में 28 अप्रैल 2025 और 8 फरवरी 2025 के ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट भी पेश किए गए।
मामले की सुनवाई करते हुए साकेत जिला न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट भानु प्रताप सिंह ने कहा कि प्रस्तुत सामग्री का अवलोकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि टिप्पणियां “यौन संकेतों वाली” हैं और शिकायतकर्ता की मर्यादा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती हैं।
अदालत ने कहा,
“रिकॉर्ड पर मौजूद ट्वीट्स प्रथम दृष्टया ऐसे अपराध का संकेत देते हैं जो कानून के तहत संज्ञेय श्रेणी में आता है।”
इसके साथ ही अदालत ने यह भी नोट किया कि पुलिस द्वारा पहले दाखिल की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट संतोषजनक नहीं थी क्योंकि उसमें सभी संबंधित ट्वीट्स का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया था।
अदालत ने माना कि चूंकि कथित अपराध साइबर स्पेस में हुआ है, इसलिए तकनीकी जांच जरूरी है। इसमें यह सत्यापित करना शामिल होगा कि संबंधित “X” अकाउंट किसके नियंत्रण में था और किन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से पोस्ट किए गए।
“इलेक्ट्रॉनिक स्रोतों की पहचान और बरामदगी के लिए पुलिस जांच अनिवार्य है,” अदालत ने कहा।
अंततः अदालत ने पीएस मालवीय नगर के SHO को निर्देश दिया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(3) और 79 के तहत FIR दर्ज की जाए और 4 मई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
इसके साथ ही धारा 175(3) BNSS के तहत दायर आवेदन का निपटारा कर दिया गया।
Case Details
Case Title: Manisha Pande & Ors. v. Abhijit Iyer Mitra
Case Number: CT Cases 2501/2025
Judge: Bhanu Pratap Singh
Decision Date: 22 April 2026











