गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत (प्री-अरेस्ट बेल) देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप बनते हैं और जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 5 अप्रैल 2026 को गुवाहाटी में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जिसमें खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनीकी भुइयां सरमा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे।
उन्होंने दावा किया था कि सरमा के पास मिस्र, UAE और एंटीगुआ-बारबुडा के पासपोर्ट हैं और उन्होंने अमेरिका में कंपनी बनाकर भारी निवेश किया है।
इन आरोपों के बाद सरमा ने पुलिस में FIR दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने सभी दावों को गलत बताया और खुद को केवल भारतीय नागरिक बताया।
न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी या साधारण मानहानि का नहीं है।
अदालत ने कहा,
“यह मामला केवल defamation तक सीमित नहीं माना जा सकता। प्रथम दृष्टया धारा 339 BNS के तहत अपराध के तत्व मौजूद हैं।”
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पुलिस के अनुसार जिन दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए गए, वे संदिग्ध या फर्जी पाए गए हैं।
पीठ ने टिप्पणी की,
“आरोप एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए जो राजनीति में सक्रिय नहीं है… बिना ठोस प्रमाण के गंभीर आरोप लगाए गए।”
अदालत ने इस तर्क को भी खारिज किया कि मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जांच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दस्तावेज कहां से आए और किन लोगों ने उन्हें जुटाया।
अदालत ने कहा,
“कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि दस्तावेज किसने और कैसे जुटाए।”
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
अंत में कोर्ट ने आदेश दिया,
“पेटिशनर अग्रिम जमानत के योग्य नहीं है… आवेदन खारिज किया जाता है।”
Case Details
Case Title: Pawan Khera v. State of Assam
Case Number: AB/804/2026
Judge: Justice Parthivjyoti Saikia
Decision Date: 24 April 2026











