मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक यूट्यूबर को राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी, जिस पर पुलिस और सरकार के खिलाफ कथित रूप से भ्रामक वीडियो प्रसारित करने का आरोप था। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान न केवल जमानत पर फैसला दिया, बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय की स्थिति पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला एक यूट्यूबर, वी. सरथकुमार, से जुड़ा है, जिन्होंने एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के आत्मदाह की घटना से संबंधित वीडियो साझा किया था। आरोप है कि वीडियो में पुलिस की भूमिका को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे यह संदेश गया कि प्रशासन ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है।
इस आधार पर पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353 के तहत मामला दर्ज किया। याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने केवल पहले से उपलब्ध सामग्री को साझा किया था और यह मूल रूप से उनका कंटेंट नहीं था।
उनके वकील ने अदालत को बताया कि:
“वीडियो के बारे में जानकारी मिलने के बाद उसे तुरंत हटा दिया गया और आगे प्रसार रोका गया।”
साथ ही यह भी कहा गया कि मोबाइल फोन पहले ही जब्त किया जा चुका है, इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।
सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध किया। उनका कहना था कि वीडियो ने पुलिस और सरकार के खिलाफ गलत धारणा बनाई और इससे समाज में भ्रम फैला।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों पर जनता से जबरन पैसे वसूलने के आरोप भी थे, जिन्हें वीडियो में नजरअंदाज किया गया।
न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन ने वीडियो सामग्री को देखने के बाद पाया कि आरोप मुख्य रूप से “री-ट्रांसमिशन” यानी पहले से प्रसारित खबर को साझा करने तक सीमित हैं।
अदालत ने कहा:
“रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि समान समाचार अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म पर पहले ही प्रसारित हो चुका था।”
अदालत ने यह भी माना कि मामला गंभीर सामाजिक मुद्दे से जुड़ा है, विशेषकर ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव और हाशिए पर रहने की स्थिति से।
न्यायालय ने टिप्पणी की:
“ट्रांसजेंडर व्यक्ति समाज का हिस्सा हैं और उन्हें सम्मान व समान अवसर मिलना चाहिए।”
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
अदालत ने कहा कि:
“सामाजिक बहिष्कार और पूर्वाग्रह ने इस समुदाय को अत्यंत कठिन परिस्थितियों में धकेल दिया है, जिसे सुधारना राज्य की जिम्मेदारी है।”
इसके तहत सरकार को निर्देश दिया गया कि वह:
- तालुक स्तर पर पुनर्वास योजना बनाए
- रोजगार और आजीविका के अवसर सुनिश्चित करे
- शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध कराए
साथ ही, मुख्य सचिव को इन उपायों के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
अदालत ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देते हुए कुछ शर्तें लगाईं।
जमानत की शर्तों में शामिल हैं:
- ₹10,000 का निजी मुचलका और दो जमानती
- 15 दिनों तक रोजाना पुलिस के सामने पेश होना
- साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित न करना
- जांच में सहयोग करना
अदालत ने स्पष्ट किया कि शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द की जा सकती है।
इसके साथ ही, ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास और कल्याण के लिए राज्य सरकार को विस्तृत योजना बनाने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया गया।
Case Details
Case Title: Sarathkumar v. State
Case Number: Crl.O.P (MD) No.5185 of 2026
Judge: Justice K.K. Ramakrishnan
Decision Date: 24 April 2026










