कर्नाटक हाईकोर्ट में एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने बिल्डर की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला एक निर्माण परियोजना से जुड़ा है, जहां बिल्डर ने कथित तौर पर स्वीकृत भवन योजना का पालन नहीं किया। विशेष रूप से, सेटबैक (खाली जगह) को लेकर विवाद था, जो आपातकालीन सेवाओं के लिए जरूरी होता है।
अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन और अन्य पक्षों ने आरोप लगाया कि बिल्डिंग में पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी गई, जिससे फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने बिल्डरों की जिम्मेदारी पर सख्त टिप्पणी की।
अदालत ने कहा,
“एक पेशेवर बिल्डर को कानून और नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की कमी को जानबूझकर किया गया कदम माना जा सकता है।”
फायर विभाग की 12 जुलाई 2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने पाया कि भवन के आसपास पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी गई, जिससे आपात स्थिति में एरियल लैडर जैसे उपकरणों का उपयोग संभव नहीं है।
पीठ ने यह भी कहा,
“ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में यह एक निवारक उदाहरण बने।”
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि भवन नियमों के उल्लंघन को हल्के में नहीं लिया जा सकता, खासकर जब यह सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा हो।
अदालत ने सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद पाया कि निचली अदालत का आदेश सही और तर्कसंगत था।
पीठ ने कहा कि इसमें किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है और अपील स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता।
अंततः, हाईकोर्ट ने बिल्डर की अपील को खारिज करते हुए कहा कि मामला सार्वजनिक हित और सुरक्षा से जुड़ा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Case Detail
Case Title: M/s. Vishnu Sri Builders and Developers vs The Commissioner, BBMP & Others
Case Number: Writ Appeal No. 1637 of 2025 (LB-BMP)
Judges: Hon’ble Mr. Justice D K Singh and Hon’ble Mr. Justice T.M. Nadaf
Decision Date: 7 April 2026










