मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक संवेदनशील मामले में पारंपरिक सजा के बजाय सुधारात्मक न्याय का रास्ता अपनाते हुए आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया। मामला डॉ. बी.आर. अंबेडकर की तस्वीर के कथित अपमान से जुड़ा था, जिसमें समझौते के आधार पर केस खत्म करने की मांग की गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अंबेडकर जयंती के अवसर पर लगाए गए पोस्टर को एक आरोपी ने फाड़कर उस पर अपमानजनक कृत्य किया, जबकि दूसरे आरोपी ने उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया।
इस घटना के आधार पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत FIR दर्ज हुई और मामला ट्रायल कोर्ट में लंबित था। बाद में पक्षकारों के बीच समझौता हो गया और आरोपियों ने हाईकोर्ट से कार्यवाही रद्द करने की मांग की।
कोर्ट ने सीधे समझौते को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि मामला केवल निजी विवाद नहीं बल्कि सामाजिक और संवैधानिक महत्व से जुड़ा है।
अदालत ने कहा,
“डॉ. अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों का प्रतीक हैं। उनके प्रति अपमान समाज के व्यापक ताने-बाने को प्रभावित करता है।”
कोर्ट ने आरोपियों को सिर्फ माफी मांगने से आगे बढ़कर कुछ विशेष निर्देश दिए:
- अंबेडकर के जीवन पर 101 किताबें खरीदना
- स्वयं पढ़ना और 100 छात्रों को वितरित करना
- स्कूल से प्रमाण लेना
- अदालत के सामने मौखिक परीक्षा देना
- ₹5,000 का दान करना
बाद में अदालत ने पाया कि आरोपियों ने इन सभी निर्देशों का पालन किया और अंबेडकर के विचारों को समझने का प्रयास किया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपियों का कृत्य “अज्ञानता और अपरिपक्वता” से जुड़ा था, और उन्होंने वास्तविक पश्चाताप दिखाया।
पीठ ने कहा,
“यह मामला अब केवल समझौते का नहीं, बल्कि वास्तविक सुधार और आत्मचिंतन का उदाहरण बन गया है।”
अदालत ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया कि स्कूल पाठ्यक्रम में डॉ. अंबेडकर के जीवन, संविधान निर्माण में उनकी भूमिका और उनके विचारों को शामिल किया जाए, ताकि छात्रों में संवैधानिक जागरूकता बढ़ सके।
कोर्ट ने सभी तथ्यों, समझौते, और आरोपियों के सुधारात्मक प्रयासों को ध्यान में रखते हुए ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा,
“इस मामले में न्याय का उद्देश्य दंड से आगे बढ़कर सुधार के माध्यम से पूरा हो चुका है, इसलिए कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा।”
Case Details
Case Title: G. Rajesh @ Rajeshkumar & Anr vs State of Tamil Nadu
Case Number: Crl.O.P.(MD) No.22813 of 2025
Judge: Justice L. Victoria Gowri
Decision Date: 30 April 2026











