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स्कूल में 5 साल की बच्ची की मौत: मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर जताया संदेह, नए सिरे से जांच के आदेश

मद्रास हाईकोर्ट ने 5 साल की बच्ची की मौत मामले में जांच पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच के लिए केस नए अधिकारी को सौंपने का आदेश दिया। - वी. मारिसामी बनाम पुलिस अधीक्षक और अन्य

Shivam Y.
स्कूल में 5 साल की बच्ची की मौत: मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर जताया संदेह, नए सिरे से जांच के आदेश

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने एक 5 वर्षीय बच्ची की संदिग्ध मौत से जुड़े मामले में जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए हस्तक्षेप किया है। अदालत ने पाया कि शुरुआती जांच में कई कमियां थीं, जिससे निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता, जो मृत बच्ची के पिता हैं, ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनकी बेटी 24 मार्च 2026 को स्कूल परिसर के अंदर मृत पाई गई। स्कूल प्रबंधन का दावा था कि बच्ची को एक कार ने टक्कर मारी, जो लापरवाही से स्कूल के अंदर चलाई जा रही थी।

हालांकि, पिता को इस घटना की सूचना समय पर नहीं दी गई। उन्हें तब पता चला जब वे स्कूल पहुंचे और बाद में अस्पताल में अपनी बेटी को मृत अवस्था में देखा। याचिकाकर्ता ने यह भी संदेह जताया कि घटना का समय और परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हैं, क्योंकि बच्ची का लंच बॉक्स भरा हुआ मिला।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि:

  • स्कूल ने घटना की जानकारी छिपाई
  • पुलिस ने समय पर FIR दर्ज नहीं की
  • CCTV फुटेज तुरंत जब्त नहीं की गई
  • आरोपियों की पहचान में देरी हुई

उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें 20 लाख रुपये देकर मामले को दबाने की कोशिश की।

न्यायमूर्ति बी. पुगलेन्धी ने मामले की सुनवाई करते हुए जांच में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया।

अदालत ने कहा,

“जब घटना की जानकारी पुलिस को पहले से थी, तो उन्हें तुरंत FIR दर्ज करनी चाहिए थी। शिकायतकर्ता का इंतजार करना उचित नहीं था।”

अदालत ने यह भी माना कि स्कूल परिसर में CCTV और सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद घटना के तथ्यों को स्पष्ट करने में लापरवाही हुई।

एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी में अदालत ने कहा,

“पीड़ितों को निष्पक्ष जांच का अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।”

अदालत ने मामले को CB-CID को ट्रांसफर करने से इनकार किया, लेकिन जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

कोर्ट ने आदेश दिया कि:

  • वर्तमान जांच अधिकारी से मामला वापस लेकर किसी सक्षम अधिकारी (डीएसपी या इंस्पेक्टर स्तर) को सौंपा जाए
  • याचिकाकर्ता को CCTV फुटेज उपलब्ध कराई जाए
  • घटना का सही समय और परिस्थितियां गवाहों से जांची जाएं
  • जांच की प्रगति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट याचिकाकर्ता को दी जाए

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आगे जांच संतोषजनक नहीं रही, तो याचिकाकर्ता फिर से जांच ट्रांसफर की मांग कर सकते हैं।

इसी के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Case Details

Case Title: V. Marisamy vs Superintendent of Police & Others

Case Number: Crl.O.P.(MD) No. 7378 of 2026

Judge: Justice B. Pugalendhi

Decision Date: 10 April 2026

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