बॉम्बे हाईकोर्ट ने आधार कार्ड में बायोमेट्रिक मिसमैच और तकनीकी त्रुटियों से जूझ रहे नागरिकों को महत्वपूर्ण राहत देते हुए कहा है कि किसी वास्तविक व्यक्ति को केवल तकनीकी गड़बड़ी के कारण पहचान संबंधी सुविधाओं से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने UIDAI को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में पारदर्शी, मानवीय और समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला जुड़वा भाइयों रोहित बंदू निकालजे और राहुल बंदू निकालजे द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। दोनों को वर्ष 2012 में नाबालिग अवस्था में आधार कार्ड जारी किए गए थे। बाद में उम्र पूरी होने पर उन्होंने 2022 में बायोमेट्रिक अपडेट के लिए आवेदन किया, लेकिन उनका अनुरोध बायोमेट्रिक मिसमैच के आधार पर अस्वीकार कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि UIDAI अधिकारियों ने पहले उन्हें आधार नंबर रद्द कराने की सलाह दी, फिर बाद में कहा गया कि वह प्रक्रिया बंद हो चुकी है और अब केवल अपडेट किया जा सकता है। कई बार क्षेत्रीय कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें स्पष्ट समाधान नहीं मिला। इस बीच, कॉलेज एडमिशन, बीमा और पहचान सत्यापन जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगीं।
न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति हितेन एस. वेणगावकर की खंडपीठ ने कहा कि आधार अधिनियम और संबंधित नियमावली तकनीकी त्रुटियों या बायोमेट्रिक समस्याओं की स्थिति में सुधार और पुनः नामांकन का रास्ता उपलब्ध कराती है। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक भ्रम की स्थिति में किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक लटकाकर नहीं रखा जा सकता।
पीठ ने कहा,
“किसी वास्तविक निवासी को केवल इसलिए बिना उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि आधार प्रणाली में बायोमेट्रिक गड़बड़ी उत्पन्न हो गई है, खासकर तब जब उसके खिलाफ धोखाधड़ी या प्रतिरूपण का कोई आरोप नहीं है।”
अदालत ने यह भी माना कि आधार डेटाबेस की सुरक्षा और शुद्धता बनाए रखना सार्वजनिक महत्व का विषय है, लेकिन इसके साथ-साथ अधिकारियों को नागरिकों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक रवैया अपनाना होगा।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता 15 दिनों के भीतर नया आधार नामांकन आवेदन जमा करें और UIDAI उनके आवेदन को केवल पुराने बायोमेट्रिक मिसमैच के आधार पर अस्वीकार न करे। अदालत ने कहा कि आवेदन मिलने के बाद चार सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए।
यदि आवेदन नियमों के अनुरूप पाए जाते हैं और कोई कानूनी बाधा नहीं होती, तो नए आधार नंबर और कार्ड जारी किए जाएं। यदि आवेदन अस्वीकार किया जाता है, तो उसका लिखित और कारणयुक्त आदेश दिया जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी नोट किया कि आधार से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में नागरिक अदालतों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। इस पर हाईकोर्ट ने UIDAI को भविष्य के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि नागरिकों को उनकी आधार स्थिति और उपलब्ध कानूनी उपायों की स्पष्ट जानकारी लिखित रूप में दी जानी चाहिए।
पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि आधार सेवा केंद्रों में बायोमेट्रिक मिसमैच और तकनीकी गड़बड़ियों के मामलों के लिए उचित सहायता व्यवस्था विकसित की जाए और छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।
अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए UIDAI और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं के नए नामांकन आवेदन कानून के अनुसार समयबद्ध तरीके से प्रोसेस करें और उन्हें अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं का सामना न करना पड़े।
Case Details
Case Title: Rohit Bandu Nikalje & Anr. v. The Regional Officer, UIDAI & Ors.
Case Number: Writ Petition No. 10771 of 2025
Judges: Justice Hiten S. Venegavkar and Justice Ravindra V. Ghuge
Decision Date: May 6, 2026











