दिल्ली हाई कोर्ट ने शादी के दस महीने के भीतर हुई महिला की मौत के मामले में पति के खिलाफ क्रूरता (धारा 498A IPC) का मामला दोबारा चलाने का आदेश दिया है। हालांकि, अदालत ने दहेज मृत्यु (धारा 304B IPC) के आरोप से मिली राहत को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पहली नजर में यह दिखाती है कि मृतका को दहेज से जुड़ी बातों को लेकर लगातार ताने दिए जाते थे। इसलिए धारा 498A के तहत आरोप तय किए जाने चाहिए। लेकिन अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा पर्याप्त सामग्री नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि कथित उत्पीड़न और महिला की मौत के बीच “निकट और प्रत्यक्ष संबंध” था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला भजनपुरा थाना में दर्ज FIR संख्या 679/2022 से जुड़ा है। मृतका प्रिया चौधरी की शादी 20 फरवरी 2022 को मनोज कुमार बैंसला से हुई थी। 12 दिसंबर 2022 को वह अपने ससुराल की बालकनी से गिर गई थीं, जिसके बाद उन्हें GTB अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतका के पिता ने आरोप लगाया था कि शादी के कुछ समय बाद से ही उनकी बेटी को दहेज को लेकर परेशान किया जाने लगा। शिकायत में कहा गया कि उसे “छोटी गाड़ी” और कम सोना लाने को लेकर ताने दिए जाते थे। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष के कुछ सदस्य उसके साथ दुर्व्यवहार करते थे।
सेशन कोर्ट ने दिसंबर 2023 में पति को धारा 498A और 304B IPC के आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार और मृतका के पिता ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट की उस टिप्पणी से असहमति जताई जिसमें कहा गया था कि कथित बातें केवल “साधारण ताने” थीं और उन्हें क्रूरता नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि जांच के दौरान दर्ज बयानों में लगातार यह आरोप सामने आया कि पति और अन्य परिजन दहेज से जुड़ी अपेक्षाओं को लेकर मृतका को अपमानित करते थे।
कोर्ट ने शिकायतकर्ता के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि मृतका ने अपने परिवार को बताया था कि उससे कहा जाता था,
“तुम्हारे बाप ने बड़ी गाड़ी देने की बात की थी लेकिन छोटी गाड़ी के पैसे दिए, और सोना भी कम दिया।”
न्यायालय ने कहा,
“ये आरोप किसी एक बार कही गई बात तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दहेज की कथित मांगों से जुड़े लगातार तानों के हैं।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के चरण में केवल यह देखा जाता है कि रिकॉर्ड पर ऐसा सामग्री है या नहीं जिससे आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता हो।
मानसिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान IHBAS के मेडिकल रिकॉर्ड भी अदालत के सामने रखे गए। रिकॉर्ड के अनुसार मृतका को schizophrenia (सिज़ोफ्रेनिया) नामक मानसिक बीमारी थी। डॉक्टरों ने बताया था कि ऐसे मरीजों में आत्महत्या की प्रवृत्ति हो सकती है।
हाई कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड को देखते हुए पति द्वारा मृतका को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पहली नजर में क्रूरता नहीं माना जा सकता। रिकॉर्ड में मृतका में “खुद से बातें करना, आवाजें सुनाई देना, नींद में परेशानी और असामान्य व्यवहार” जैसे लक्षण दर्ज थे।
दहेज हत्या का आरोप क्यों नहीं बहाल हुआ
धारा 304B IPC पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई विशेष घटनाक्रम नहीं दिखता जो यह बताए कि मौत से ठीक पहले मृतका को दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि घटना के समय पति ड्यूटी पर था और रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे लगे कि वह मौके पर मौजूद था या उसने मृतका को धक्का दिया।
अदालत ने कहा,
“रिकॉर्ड पर ऐसा कोई विशेष घटनाक्रम नहीं है जो मृत्यु के निकट समय में कथित उत्पीड़न और मौत के बीच आवश्यक प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करे।”
फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से रद्द करते हुए पति के खिलाफ धारा 498A IPC के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया। साथ ही, धारा 304B IPC के तहत मिली राहत को बरकरार रखा।
ट्रायल कोर्ट को आगे कानून के अनुसार कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया गया।
Case Detials:
Case Title: State (GNCTD) v. Manoj Kumar & connected matter
Case Number: CRL.REV.P. 649/2024 & CRL.REV.P. 699/2024
Judge: Justice Swarana Kanta Sharma
Decision Date: May 5, 2026











