एक संवेदनशील आपराधिक मामले में, गुजरात उच्च न्यायालय ने यह जांच की कि क्या पत्नी की मृत्यु के लिए जिम्मेदार पति का कृत्य “गंभीर और अचानक उकसावे” (grave and sudden provocation) का परिणाम था या एक दंडनीय अपराध।
यह फैसला न्यायमूर्ति गीता गोपी ने 25 मार्च 2026 को सुनाया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 31 जुलाई 1997 की देर रात का है। आरोपी हसमुखभाई वसावा को निचली अदालत ने IPC की धारा 304 भाग-II के तहत दोषी ठहराते हुए 5 साल की सजा सुनाई थी।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने अपनी पत्नी को घर में एक अन्य व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा। इसके बाद गुस्से में आकर उसने पत्नी के साथ मारपीट की।
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बताया गया कि आरोपी ने मुक्कों, लातों और लकड़ी के टुकड़े से हमला किया, जिससे पत्नी को गंभीर चोटें आईं और उसकी मृत्यु हो गई।
आरोपी के वकील ने अदालत में कहा कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी।
उन्होंने तर्क दिया कि:
“आरोपी ने अपनी पत्नी को आपत्तिजनक स्थिति में देखकर अपना आपा खो दिया और उसी क्षण प्रतिक्रिया दी।”
बचाव पक्ष ने IPC की धारा 300 के अपवाद (Exception 1) का लाभ देने की मांग की, जिसमें अचानक और गंभीर उकसावे की स्थिति में हत्या को अलग दृष्टि से देखा जाता है।
राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि घटना अत्यंत क्रूर थी और आरोपी ने जानबूझकर हमला किया।
उन्होंने चोटों की गंभीरता का हवाला देते हुए कहा कि यह साधारण प्रतिक्रिया नहीं बल्कि गंभीर अपराध का मामला है।
हाई कोर्ट ने साक्ष्यों का विस्तार से विश्लेषण किया, जिसमें शामिल थे:
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट (जिसमें कई गंभीर चोटें और लीवर फटने का उल्लेख था)
- आरोपी के बयान और स्वीकारोक्ति
- घटनास्थल और गवाहों के बयान
अदालत ने कहा:
“यदि अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति स्वेच्छा से और विश्वसनीय हो, तो उसे साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।”
मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि क्या आरोपी को IPC की धारा 300 के अपवाद का लाभ मिल सकता है।
अदालत ने माना कि जीवनसाथी को आपत्तिजनक स्थिति में देखना एक गंभीर उकसावा हो सकता है।
लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि:
- उकसावा अचानक और गंभीर दोनों होना चाहिए
- प्रतिक्रिया तुरंत और बिना पूर्व योजना के होनी चाहिए
अदालत ने यह भी देखा कि आरोपी पहले से अपनी पत्नी पर संदेह कर रहा था, जो इस मामले में महत्वपूर्ण पहलू बना।
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अदालत ने पाया कि:
- आरोपी को पहले से पत्नी पर संदेह था
- उसने खुद मारपीट करने की बात स्वीकार की
- मेडिकल साक्ष्य चोटों की गंभीरता को साबित करते हैं
इसके अलावा, घटना के तुरंत बाद आरोपी द्वारा दिए गए बयान (जैसे एम्बुलेंस चालक और अधिकारी को) को विश्वसनीय माना गया।
सभी साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद, गुजरात हाई कोर्ट ने मामले में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय को बरकरार रखा और ‘गंभीर व अचानक उकसावे’ के सिद्धांत की सीमाओं को स्पष्ट किया।
Case Details
Case Title: Hasmukhbhai Bhurabhai Vasava vs State of Gujarat
Case Number: Criminal Appeal No. 816 of 2001
Judge: Justice Gita Gopi
Decision Date: March 25, 2026
Counsels:
- For Appellant: Mr. V.D. Parghi
- For State: Ms. Jyoti Bhatt (APP)










