सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में जारी अवैध रेत खनन पर कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को तुरंत प्रभाव से सख्त कदम उठाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि हालात इतने गंभीर हैं कि अब न्यायालय मूक दर्शक नहीं रह सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद शुरू हुआ। अदालत के सामने ऐसी रिपोर्टें आईं जिनमें बताया गया कि चंबल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन हो रहा है, जिससे घड़ियाल सहित दुर्लभ जलीय जीवों के आवास को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने दो वनकर्मियों की ड्यूटी के दौरान मौत की घटनाएं भी रखी गईं। आरोप है कि अवैध खनन रोकने की कोशिश के दौरान उन्हें वाहनों से कुचल दिया गया।
पीठ ने कहा कि राज्य प्राधिकरण कानून लागू करने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जिम्मेदारी निभाने में विफल दिख रहे हैं। अदालत ने टिप्पणी की,
“स्थिति प्रशासनिक उदासीनता और संस्थागत विफलता को दर्शाती है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अधिकारी पर्याप्त संसाधनों के अभाव का बहाना बनाते हैं, तो यह स्वीकार्य नहीं है। राज्य अपने ही ढांचे की कमजोरी का सहारा लेकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
अदालत ने अवैध खनन रोकने के लिए कई अंतरिम निर्देश जारी किए:
चंबल क्षेत्र के संवेदनशील मार्गों और नदी किनारों पर हाई-रिजॉल्यूशन Wi-Fi सक्षम CCTV कैमरे लगाए जाएं।
इन कैमरों की लाइव निगरानी संबंधित जिले के एसपी/एसएसपी और वन अधिकारियों के नियंत्रण में रहे।
मुरैना (मध्य प्रदेश) और धौलपुर (राजस्थान) में खनन से जुड़े वाहनों व मशीनों में GPS ट्रैकिंग अनिवार्य की जाए।
तीनों राज्यों में पुलिस और वन विभाग के संयुक्त गश्ती दल बनाए जाएं, जिन्हें आधुनिक उपकरण और सुरक्षा साधन दिए जाएं।
अवैध खनन में पकड़े गए वाहन तुरंत जब्त किए जाएं और संबंधित लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए “Polluter Pays Principle” के तहत मुआवजा वसूला जाए।
कोर्ट ने साफ कहा कि यदि अगली सुनवाई तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वह और कठोर आदेश पारित कर सकता है। इसमें अर्धसैनिक बलों की तैनाती, पूर्ण खनन प्रतिबंध और भारी आर्थिक दंड जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आवेदन का निस्तारण करते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को विस्तृत अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मुख्य मामले की अगली सुनवाई 11 मई 2026 को तय की गई है।
Case Details
Case Title: Illegal Sand Mining in the National Chambal Sanctuary and Threat to Endangered Aquatic Wildlife
Case Number: Suo Motu Writ Petition (Civil) No. 2 of 2026
Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta
Decision Date: April 17, 2026











