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सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के कर्मचारियों के लिए सीमित नियमितीकरण को बरकरार रखा, अनियमित नियुक्तियों की अनुमति देने वाली नीति को रद्द किया।

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा की 2014 नियमितीकरण नीति पर फैसला देते हुए कुछ अधिसूचनाओं को वैध और कुछ को अवैध घोषित किया, कर्मचारियों को आंशिक राहत मिली। - मदन सिंह और अन्य बनाम हरियाणा राज्य और अन्य।

Shivam Y.
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के कर्मचारियों के लिए सीमित नियमितीकरण को बरकरार रखा, अनियमित नियुक्तियों की अनुमति देने वाली नीति को रद्द किया।

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार की 2014 की नियमितीकरण नीतियों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आंशिक राहत दी है। कोर्ट ने कुछ अधिसूचनाओं को वैध ठहराया, जबकि कुछ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला हरियाणा सरकार द्वारा 2014 में जारी की गई उन अधिसूचनाओं से जुड़ा था, जिनके जरिए ग्रुप ‘B’, ‘C’ और ‘D’ के संविदा, दैनिक वेतनभोगी और एड-हॉक कर्मचारियों को नियमित करने की कोशिश की गई थी।

इन अधिसूचनाओं को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2018 में रद्द कर दिया था, यह कहते हुए कि वे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों, खासकर Umadevi केस, के विपरीत हैं।

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इसके खिलाफ राज्य सरकार और प्रभावित कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न अधिसूचनाओं को अलग-अलग दृष्टिकोण से परखा।

कोर्ट ने कहा कि 16 जून 2014 और 18 जून 2014 की अधिसूचनाओं का उद्देश्य उन कर्मचारियों को लाभ देना था, जो पहले की नीतियों के तहत नियमित नहीं हो पाए थे।

बेंच ने स्पष्ट किया:

“इन अधिसूचनाओं का उद्देश्य पहले से छूटे कर्मचारियों को समान लाभ देना था, और इन्हें मनमाना या अवैध नहीं कहा जा सकता।”

वहीं, 7 जुलाई 2014 की अधिसूचनाओं पर कोर्ट ने गंभीर आपत्ति जताई।

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कोर्ट ने कहा:

“बिना विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के नियुक्त कर्मचारियों को नियमित करने का प्रयास संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।”

साथ ही, भविष्य की तारीख (31.12.2018) को आधार बनाकर नियमितीकरण करना भी अनुचित बताया गया।

मुख्य सवाल यह था कि क्या राज्य सरकार संविदा या अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने के लिए ऐसी नीतियां बना सकती है, जो नियमित भर्ती प्रक्रिया को दरकिनार करती हों।

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कोर्ट ने दोहराया कि नियमितीकरण कोई वैकल्पिक भर्ती प्रक्रिया नहीं हो सकती और समान अवसर का सिद्धांत बनाए रखना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में हाईकोर्ट के निर्णय को आंशिक रूप से संशोधित किया:

  • 16 जून 2014 और 18 जून 2014 की अधिसूचनाओं को वैध घोषित किया गया।
  • इन अधिसूचनाओं के तहत आने वाले योग्य कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने का रास्ता साफ किया गया।
  • 7 जुलाई 2014 की अधिसूचनाओं को मनमाना और अवैध बताते हुए रद्द कर दिया गया।
  • हालांकि, इन अधिसूचनाओं के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को तत्काल हटाने से राहत दी गई और उन्हें न्यूनतम वेतनमान पर सेवा जारी रखने की अनुमति दी गई।

Case Details

Case Title: Madan Singh & Ors. vs State of Haryana & Ors.

Case Number: Civil Appeal No. 1996 of 2024 & connected matters

Judges: Justice Pamidighantam Sri Narasimha, Justice Atul S. Chandurkar

Decision Date: 16 April 2026

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