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वैवाहिक घर में हुई संदिग्ध मौत आत्महत्या नहीं, हत्या थी: सुप्रीम कोर्ट ने पति की उम्रकैद बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की एक वैवाहिक मृत्यु मामले में पति की उम्रकैद बरकरार रखते हुए कहा कि मेडिकल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य हत्या की ओर इशारा करते हैं। - चेतन दशरथ गाडे बनाम महाराष्ट्र राज्य

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वैवाहिक घर में हुई संदिग्ध मौत आत्महत्या नहीं, हत्या थी: सुप्रीम कोर्ट ने पति की उम्रकैद बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के एक चर्चित वैवाहिक मृत्यु मामले में पति की हत्या की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि मामले में मौजूद परिस्थितिजन्य और चिकित्सीय साक्ष्य स्पष्ट रूप से गला दबाकर हत्या की ओर इशारा करते हैं, आत्महत्या की ओर नहीं।

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने चेतन दशरथ गाडे की अपील खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

मामले की पृष्ठभूमि

रूपाली की शादी अप्रैल 2012 में आरोपी चेतन गाडे से हुई थी। वह अपने पति और ससुराल वालों के साथ महाराष्ट्र के नाशिक जिले में रह रही थी। अगस्त 2015 में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही रूपाली को पैसे और सोने की मांग को लेकर परेशान किया जाता था। उन्होंने यह भी बताया कि जब परिवार अस्पताल पहुंचा तो रूपाली के शरीर से कुछ आभूषण - जैसे एक कान की बाली, पायल और बिछिया - गायब थे।

सेशन कोर्ट ने आरोपी पति को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा।

आरोपी की ओर से कहा गया कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और पूरा केस केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि मृतका द्वारा लिखा गया एक कथित सुसाइड नोट मिला था, जिसमें किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया था।

यह तर्क भी दिया गया कि मेडिकल विशेषज्ञों की राय में विरोधाभास था और मौत के कारण को लेकर संदेह मौजूद है, इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य मेडिकल साक्ष्य स्पष्ट रूप से गला दबाकर हत्या की ओर संकेत करते हैं।

पीठ ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि मृतका की हायॉइड बोन और ट्रेकिया में फ्रैक्चर पाया गया था तथा शरीर पर चोट के निशान भी मौजूद थे।

अदालत ने यह भी कहा कि मृतका के शरीर से आभूषणों का गायब होना महत्वपूर्ण परिस्थिति है, क्योंकि सामान्य फांसी के मामलों में ऐसे आभूषणों का निकल जाना “बहुत कम संभावना” वाला माना जाता है।

कथित सुसाइड नोट पर भी कोर्ट ने संदेह जताया। फैसले में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर माना था कि यह नोट संभवतः दबाव में लिखवाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घटना वैवाहिक घर के भीतर हुई थी, इसलिए आरोपी पति पर यह जिम्मेदारी थी कि वह मौत की परिस्थितियों का संतोषजनक स्पष्टीकरण दे। अदालत ने माना कि आरोपी ऐसा करने में पूरी तरह विफल रहा।

पीठ ने कहा,

“अभियोजन पक्ष ने परिस्थितियों की ऐसी पूर्ण और अखंड श्रृंखला स्थापित की है जो सीधे आरोपी के दोष की ओर इशारा करती है।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए आरोपी की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा साक्ष्यों की सराहना में कोई कानूनी त्रुटि या न्याय का हनन नहीं पाया गया।

हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोपी राज्य की नीति के अनुसार समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन देने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

Case Details

Case Title: Chetan Dashrath Gade v. State of Maharashtra

Case Number: Criminal Appeal No. 1063 of 2021

Judge: Justice Pankaj Mithal and Justice Prasanna B. Varale

Decision Date: May 21, 2026

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