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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने PSA के तहत हिरासत को बताया अवैध, कहा-रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटियाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर चोट

Vivek G.
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने PSA के तहत हिरासत को बताया अवैध, कहा-रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटियाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर चोट

जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मुदासिर अहमद भट की जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत की गई निरोधात्मक हिरासत को अवैध घोषित कर दिया। अदालत ने पाया कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियाँ और तथ्यों में स्पष्ट विरोधाभास मौजूद थे, जो इस तरह की कठोर कार्रवाई के लिए आवश्यक सावधानी के विपरीत हैं।

न्यायमूर्ति राहुल भारती ने कहा कि निवारक हिरासत जैसे संवेदनशील अधिकार क्षेत्र में लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता मुदासिर अहमद भट ने अपनी पत्नी के माध्यम से हैबियस कॉर्पस की मांग की।

याचिकाकर्ता को 30 अप्रैल 2025 को पुलवामा के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट, 1978 की धारा 8 के तहत निरोधात्मक हिरासत में रखने का आदेश दिया गया था। आदेश के अनुसार, उन्हें 1 मई 2025 को गिरफ्तार कर जिला जेल उधमपुर में रखा गया।

पुलिस के अनुसार, वह पुलवामा के मुख्य बाजार में टिन की दुकान पर सेल्समैन के रूप में काम करते थे और उन पर आरोप था कि वे आतंकवादियों को रसद सहायता देने तथा युवाओं को उकसाने जैसी गतिविधियों में शामिल थे।

सरकार ने बाद में इस हिरासत को मंजूरी दी और छह महीने की अवधि निर्धारित की, जिसे बाद में आगे बढ़ा दिया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया और पाया कि पुलिस डोज़ियर और हिरासत के आधारों में महत्वपूर्ण असंगतियाँ थीं।

न्यायालय ने पाया कि पुलिस डोज़ियर में बताया गया था कि याचिकाकर्ता को 28 फरवरी 2025 और 23 अप्रैल 2025 को पुलिस स्टेशन बुलाया गया था, जबकि हिरासत आदेश में दूसरी तारीख 23 फरवरी 2025 लिखी गई थी। अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से बिना सोच-समझ के तैयार किया गया दस्तावेज़ दर्शाता है।

अदालत ने कहा:

“निवारक हिरासत जैसे गंभीर अधिकार क्षेत्र में अधिकारियों से अत्यधिक सावधानी और सतर्कता अपेक्षित होती है, लेकिन इस मामले में रिकॉर्ड दर्शाता है कि संबंधित अधिकारियों ने आवश्यक ध्यान नहीं दिया।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि जेल अधीक्षक की एक चिट्ठी में उल्लेख था कि याचिकाकर्ता 5 दिसंबर 2024 से ही जेल में बंद था, जबकि विवादित हिरासत आदेश 30 अप्रैल 2025 को जारी हुआ था। इससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

न्यायालय ने कहा कि इतनी स्पष्ट त्रुटियाँ यह दिखाती हैं कि मामले को प्रशासनिक स्तर पर उचित सतर्कता के साथ नहीं संभाला गया।

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता की निवारक हिरासत संवैधानिक मानकों के अनुरूप नहीं थी।

अदालत ने आदेश दिया कि 30 अप्रैल 2025 का हिरासत आदेश और उससे जुड़े सरकार के सभी अनुमोदन व विस्तार आदेश अवैध हैं और उन्हें निरस्त किया जाता है।

साथ ही, अदालत ने जिला जेल उधमपुर के अधीक्षक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को तुरंत उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल करते हुए रिहा किया जाए।

Case Title: Mudasir Ahmad Bhat v. Union Territory of J&K & Others

Case No.: HCP No. 147/2025

Decision Date: 12 March 2026

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