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विरोध प्रदर्शन में कथित अपशब्दों का मामला: एमपी हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री के खिलाफ FIR और चार्जशीट रद्द की

बंश मणि वर्मा बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री बंश मणि वर्मा के खिलाफ दर्ज IPC 294 और 504 के मामले को रद्द किया, कहा– केवल कठोर शब्द अपराध नहीं बनते।

Vivek G.
विरोध प्रदर्शन में कथित अपशब्दों का मामला: एमपी हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री के खिलाफ FIR और चार्जशीट रद्द की

एमपी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पूर्व मंत्री बंश मणि वर्मा के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ कठोर या आलोचनात्मक शब्दों का इस्तेमाल मात्र से IPC की धारा 294 (अश्लीलता) और 504 (जानबूझकर अपमान) के अपराध स्वतः सिद्ध नहीं हो जाते।

यह आदेश न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने सुनाया।

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मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार 23 जुलाई 2021 को सिंगरौली जिले के वैढ़न में बढ़ती महंगाई के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा एक विरोध रैली आयोजित की गई थी।

रैली के दौरान जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के समय यह आरोप लगा कि याचिकाकर्ता, जो उस समय पूर्व कैबिनेट मंत्री बताए गए, ने जिला प्रशासन और कलेक्टर के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।

इस घटना के बाद उप-मंडल अधिकारी के निर्देश पर 25 जुलाई 2021 को वैढ़न थाने में FIR दर्ज की गई। शुरुआत में मामला धारा 294 IPC के तहत दर्ज हुआ और जांच के बाद धारा 504 IPC भी जोड़ी गई। बाद में पुलिस ने 19 अगस्त 2021 को चार्जशीट दाखिल कर दी।

याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले को निरस्त करने के लिए अदालत का रुख किया।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि FIR में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए अपशब्दों का स्पष्ट उल्लेख ही नहीं है।

उनका कहना था कि:

  • शिकायत में यह नहीं बताया गया कि कौन-से शब्द बोले गए।
  • यह भी साबित नहीं किया गया कि किसी अश्लील कृत्य या शब्दों से सार्वजनिक लोगों को असुविधा हुई।
  • कथित बयान प्रशासन की कार्यप्रणाली की आलोचना के संदर्भ में दिए गए थे।

वकील ने अदालत से कहा कि, “ऐसे सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।”

राज्य और शिकायतकर्ता का पक्ष

राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से इस याचिका का विरोध किया गया।

उनका कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और याचिकाकर्ता द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।

सरकार के वकील ने अदालत से कहा कि,
“सार्वजनिक स्थान पर प्रशासन के खिलाफ इस प्रकार की अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करना शांति भंग करने की स्थिति पैदा कर सकता है, इसलिए मुकदमे की सुनवाई जारी रहनी चाहिए।”

अदालत की प्रमुख टिप्पणियां

धारा 294 IPC पर अदालत की राय

अदालत ने कहा कि धारा 294 IPC लागू होने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि:

  • सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द बोले गए हों
  • और उनसे लोगों को वास्तविक असुविधा या परेशानी हुई हो

अदालत ने पाया कि मामले के रिकॉर्ड में ऐसे किसी भी शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं है जिसे अश्लील कहा जा सके।

पीठ ने कहा, “केवल अपमानजनक या कठोर शब्द अपने-आप में अश्लील नहीं माने जा सकते जब तक उनमें अश्लीलता का तत्व स्पष्ट रूप से मौजूद न हो।”

अदालत ने यह भी कहा कि “नालायक” जैसे सामान्य शब्द रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल होते हैं और संदर्भ के आधार पर उन्हें स्वतः अपराध नहीं माना जा सकता।

धारा 504 IPC पर अदालत की राय

अदालत ने कहा कि धारा 504 IPC के लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी ने जानबूझकर ऐसा अपमान किया हो जिससे सामने वाला व्यक्ति शांति भंग करने के लिए उकस जाए।

लेकिन इस मामले में:

  • कथित टिप्पणियां प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ थीं
  • कलेक्टर स्वयं मौके पर मौजूद नहीं थे
  • और किसी व्यक्ति को उकसाने का कोई प्रमाण रिकॉर्ड में नहीं है

अदालत ने कहा, “राजनीतिक विरोध के दौरान प्रशासन के खिलाफ कठोर शब्दों का प्रयोग, बिना किसी स्पष्ट उकसावे के, धारा 504 IPC के अपराध को सिद्ध नहीं करता।”

स्वतंत्र गवाहों का अभाव

अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि घटना सार्वजनिक स्थान पर हुई बताई गई, फिर भी जांच में किसी स्वतंत्र नागरिक को गवाह के रूप में शामिल नहीं किया गया।

FIR एक पटवारी द्वारा उप-मंडल अधिकारी के निर्देश पर दर्ज की गई थी और चार्जशीट में मुख्यतः प्रशासनिक अधिकारियों के बयान ही शामिल थे।

अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से किसी संज्ञेय अपराध का स्पष्ट आधार नहीं बनता।

अदालत का फैसला

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि FIR और जांच में एकत्र सामग्री, भले ही पूरी तरह सही मान ली जाए, तब भी IPC की धारा 294 और 504 के आवश्यक तत्व स्थापित नहीं होते।

पीठ ने कहा कि ऐसे हालात में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

अदालत ने आदेश दिया कि:

  • वैढ़न थाना, जिला सिंगरौली में दर्ज Crime No. 896/2021
  • उससे संबंधित चार्जशीट दिनांक 19 अगस्त 2021
  • तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिंगरौली की अदालत में लंबित आपराधिक कार्यवाही

सभी को रद्द किया जाता है।

Case Title: Bansh Mani Verma vs State of Madhya Pradesh & Others

Case No.: MCRC No. 55648 of 2024

Decision Date: 05 March 2026

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