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'बैंक ग्राहक के निर्देश नहीं अनदेखा कर सकता': सुप्रीम कोर्ट ने निर्यातक की जिम्मेदारी बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉरपोरेट गारंटी देने वाला पक्ष भुगतान से बच नहीं सकता और बैंक की गलती पर उसे जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता। - कैनरा बैंक ओवरसीज ब्रांच बनाम आर्केन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और अन्य।

Shivam Y.
'बैंक ग्राहक के निर्देश नहीं अनदेखा कर सकता': सुप्रीम कोर्ट ने निर्यातक की जिम्मेदारी बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई पक्ष “कॉरपोरेट गारंटी” देकर भुगतान का आश्वासन देता है, तो वह बाद में जिम्मेदारी से बच नहीं सकता भले ही बैंक की गलती से पैसा कहीं और चला जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक ग्राहक के निर्देशों के खिलाफ जाकर रकम ट्रांसफर नहीं कर सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 1998 का है, जब दुबई स्थित एक कंपनी ने जहाज की मरम्मत की थी। इस काम के बदले भुगतान नहीं होने पर विवाद शुरू हुआ।

एक भारतीय कंपनी (Archean Industries) ने जहाज मालिक की ओर से 1 लाख अमेरिकी डॉलर देने का आश्वासन दिया और “कॉरपोरेट गारंटी” भी जारी की।

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बाद में इस रकम को बैंक के जरिए भेजा जाना था, लेकिन बैंक ने गलती से यह रकम जहाज मालिक को भेज दी, न कि मरम्मत करने वाली कंपनी को।

इस पर भुगतान न मिलने के कारण वसूली का मुकदमा दायर किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से साफ है कि कंपनी ने स्पष्ट रूप से भुगतान करने का वादा किया था।

कोर्ट ने कहा:

“दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट है कि प्रतिवादी ने स्वतंत्र रूप से भुगतान की जिम्मेदारी ली थी, जो एक वैध गारंटी है।”

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गारंटी एक अलग और स्वतंत्र अनुबंध होती है, जिसे आसानी से नकारा नहीं जा सकता।

इसके अलावा, अदालत ने बैंक की भूमिका पर भी सख्त टिप्पणी की:

“बैंक को ग्राहक के स्पष्ट निर्देशों का पालन करना चाहिए था या स्पष्टीकरण लेना चाहिए था; वह मनमाने ढंग से रकम ट्रांसफर नहीं कर सकता।”

कोर्ट ने दो महत्वपूर्ण बातें तय कीं:

  1. कंपनी की जिम्मेदारी: जिसने गारंटी दी, वह भुगतान के लिए जिम्मेदार रहेगी अगर बैंक ने गलती की हो।
  2. बैंक की जिम्मेदारी: बैंक ने गलत खाते में रकम भेजकर अपनी जिम्मेदारी का उल्लंघन किया, इसलिए उसे कंपनी को उस राशि की भरपाई करनी होगी।

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कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी बैंक से वसूली कर सकती है, क्योंकि हाई कोर्ट ने सही तरीके से “थर्ड पार्टी डिक्री” दी थी।

इससे यह सुनिश्चित हुआ कि मूल भुगतान पाने वाली कंपनी को नुकसान न हो और गलती करने वाला पक्ष जिम्मेदार ठहरे।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अपीलों को खारिज कर दिया और हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

  • कंपनी को भुगतान करने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया
  • बैंक को कंपनी को राशि वापस करने का आदेश बरकरार रखा गया
  • किसी भी पक्ष को लागत (costs) नहीं दी गई

Case Title: Canara Bank Overseas Branch v. Archean Industries Pvt Ltd & Anr. (with connected appeal)

Case Number: Civil Appeal Nos. 13861–13862 of 2024

Judge: Justice R. Mahadevan & Justice J.B. Pardiwala

Decision Date: March 17, 2026

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