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दिल्ली हाईकोर्ट ने रामानुजन कॉलेज प्रिंसिपल का सस्पेंशन रद्द किया, कहा-आदेश में ‘गंभीर दुराचार’ लिखना कलंकित करने जैसा

दिल्ली हाईकोर्ट ने रामानुजन कॉलेज प्रिंसिपल का सस्पेंशन आदेश रद्द किया और कहा कि आदेश की भाषा व्यक्ति को कलंकित करने वाली थी। - प्रो. रसाल सिंह बनाम दिल्ली विश्वविद्यालय एवं अन्य।

Rajan Prajapati
दिल्ली हाईकोर्ट ने रामानुजन कॉलेज प्रिंसिपल का सस्पेंशन रद्द किया, कहा-आदेश में ‘गंभीर दुराचार’ लिखना कलंकित करने जैसा

दिल्ली हाईकोर्ट ने रामानुजन कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. रासल सिंह को निलंबित करने वाले आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि सस्पेंशन ऑर्डर में ऐसे शब्द इस्तेमाल किए गए थे, जो किसी व्यक्ति की छवि खराब कर सकते हैं, जबकि मामले की जांच अभी लंबित थी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला कॉलेज की कुछ महिला फैकल्टी सदस्यों की शिकायतों से जुड़ा था। शिकायतों के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े स्तर पर एक एड-हॉक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई गई थी। बाद में कॉलेज ने 18 सितंबर 2025 को प्रो. रासल सिंह को निलंबित कर दिया।

प्रो. सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कमेटी की वैधता और सस्पेंशन आदेश दोनों को चुनौती दी थी।

अदालत ने साफ किया कि भले ही PoSH Act में सीधे तौर पर सस्पेंशन का प्रावधान न हो, लेकिन नियोक्ता अपने प्रशासनिक अधिकारों के तहत जांच लंबित रहने तक किसी कर्मचारी को निलंबित कर सकता है।

कोर्ट ने कहा,

“संस्था के पास यह अधिकार है कि यदि जांच प्रभावित होने की आशंका हो तो वह अस्थायी कदम उठा सके।”

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि PoSH Act के तहत शिकायतों की जांच के लिए Internal Complaints Committee (ICC) का स्पष्ट ढांचा मौजूद है। ऐसे में ICC से पहले समानांतर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाना कानून की योजना से बाहर है।

अदालत ने माना कि ऐसी कमेटी बनाना वैधानिक ढांचे के अनुरूप नहीं था।

कोर्ट ने सस्पेंशन आदेश की भाषा पर गंभीर टिप्पणी की। आदेश में “serious misconduct and harassment” जैसे शब्द लिखे गए थे।

अदालत ने कहा,

“ऐसे शब्द पढ़ने वाला कोई भी व्यक्ति संबंधित कर्मचारी के बारे में नकारात्मक राय बना सकता है।”

कोर्ट ने आगे कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी कर्मचारी को दोषी जैसा दिखाना उचित नहीं है और इससे निष्पक्षता का सिद्धांत प्रभावित होता है।

हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2025 का सस्पेंशन आदेश रद्द कर दिया। हालांकि अदालत ने कॉलेज को कानून के अनुसार नया आदेश जारी करने की स्वतंत्रता दी। याचिका और लंबित आवेदन इसी के साथ निस्तारित कर दिए गए।

Case Details

Case Title: Prof. Rasal Singh v. University of Delhi & Ors.

Case Number: W.P.(C) 14760/2025

Judge: Justice Purushaindra Kumar Kaurav

Decision Date: April 24, 2026

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