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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सामूहिक बलात्कार मामले में दोषी की बार-बार दायर की गई अंतरिम जमानत याचिका खारिज की, ₹25,000 का जुर्माना लगाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने गैंगरेप मामले के दोषी की बार-बार दाखिल अंतरिम जमानत याचिका खारिज करते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। - राजन बनाम राज्य

Shivam Y.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सामूहिक बलात्कार मामले में दोषी की बार-बार दायर की गई अंतरिम जमानत याचिका खारिज की, ₹25,000 का जुर्माना लगाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने गैंगरेप मामले में 20 साल की सजा काट रहे दोषी की अंतरिम सजा निलंबन की नई याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि एक ही आधार पर बार-बार राहत मांगना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा ने 12 मई 2026 को यह आदेश पारित किया। दोषी राजन ने अपनी मां की प्रस्तावित गॉल ब्लैडर सर्जरी के दौरान देखभाल के लिए अस्थायी रिहाई की मांग की थी।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, मामला जून 2010 की घटना से जुड़ा है। आरोप था कि आरोपी और उसके सह-आरोपी ने दिल्ली में 14 वर्षीय लड़की को गलत तरीके से बंधक बनाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था।

ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2019 में आरोपी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

वर्तमान याचिका में दोषी ने कहा कि उसकी मां गॉल ब्लैडर स्टोन से पीड़ित हैं और उनकी सर्जरी होनी है, इसलिए ऑपरेशन से पहले और बाद में उसकी मौजूदगी जरूरी है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 से अब तक दाखिल की गई सभी अंतरिम जमानत याचिकाओं का रिकॉर्ड देखा। अदालत ने पाया कि पहले भी कई बार मां की बीमारी और सर्जरी का हवाला देकर राहत मांगी गई थी।

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि आरोपी को कई मौकों पर अंतरिम राहत मिली, लेकिन कुछ मामलों में वह तय समय पर वापस जेल में आत्मसमर्पण नहीं कर पाया।

पीठ ने यह भी नोट किया कि पहले जिन सर्जरी का हवाला दिया गया था, वे बाद में टल गईं या नहीं हो सकीं, जिसके बाद अंतरिम राहत बढ़ाने के लिए नई याचिकाएं दाखिल की गईं।

अदालत ने कहा,

“ऐसा प्रतीत होता है कि रणनीति किसी तरह अंतरिम राहत प्राप्त करने और बाद में सर्जरी न होने का आधार लेकर अवधि बढ़वाने की है।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि जब अदालत राहत देने के पक्ष में नहीं दिखी, तब कुछ आवेदन वापस ले लिए गए।

हाईकोर्ट ने आरोपी के आचरण को “अदालत की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग” बताते हुए कहा कि वर्तमान आवेदन में कोई वास्तविक आधार नहीं बनता।

अपराध की गंभीरता और आरोपी के पिछले आचरण को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और ₹25,000 का जुर्माना लगाया। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि एक महीने के भीतर दिल्ली हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में जमा कराई जाए।

Case Details

Case Title: Rajan v. State

Case Number: CRL.A. 1195/2019

Judge: Justice Chandrasekharan Sudha

Decision Date: May 12, 2026

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