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दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत एक वर्ष की प्रतीक्षा अवधि माफ की, कहा- शादी सिर्फ कागज़ों तक सीमित रही

दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह के एक वर्ष पूरे होने से पहले आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर करने की अनुमति दी और इसे “असाधारण कठिनाई” का मामला माना। - शाहबाज खान बनाम कोमल श्रेष्ठ

Shivam Y.
दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत एक वर्ष की प्रतीक्षा अवधि माफ की, कहा- शादी सिर्फ कागज़ों तक सीमित रही

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत विवाह के एक वर्ष पूरे होने से पहले आपसी सहमति से तलाक की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने माना कि मामले की परिस्थितियां ऐसी थीं कि वैवाहिक संबंध को बनाए रखने का कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं बचा था और प्रतीक्षा अवधि लागू करना केवल पक्षकारों की परेशानियां बढ़ाता।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला शाहबाज खान और कोमल श्रेष्ठ से जुड़ा है, जिन्होंने 25 अगस्त 2025 को विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह किया था। दोनों अलग-अलग धर्मों से संबंध रखते हैं।

अदालत के समक्ष बताया गया कि विवाह की जानकारी मिलने के बाद पति के परिवार में गंभीर तनाव पैदा हो गया। पति के अनुसार, उसके पिता को गहरा सदमा लगा और परिवार ने उससे संबंध तोड़ लिए। दूसरी ओर, पत्नी ने भी अपने परिवार से विवाह की जानकारी छिपाए रखी क्योंकि उसे आशंका थी कि उसके साथ भी ऐसा ही व्यवहार हो सकता है।

रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि विवाह के बाद दोनों कभी साथ नहीं रहे, वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं हुए और न ही किसी परिवार या समाज ने इस रिश्ते को स्वीकार किया।

इन्हीं परिस्थितियों में दोनों ने आपसी सहमति से तलाक लेने का निर्णय लिया और वैधानिक प्रतीक्षा अवधि माफ करने का अनुरोध किया। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी थी।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि विशेष विवाह अधिनियम में निर्धारित समय-सीमाओं का उद्देश्य विवाह संस्था की रक्षा करना है, लेकिन कानून अदालतों को असाधारण मामलों में राहत देने का अधिकार भी देता है।

पीठ ने कहा कि इस मामले में विवाह केवल औपचारिक रूप से अस्तित्व में था। न तो पति-पत्नी ने साथ जीवन बिताया, न ही विवाह को सामाजिक या पारिवारिक स्वीकृति मिली।

अदालत ने कहा,

“पक्षकारों के बीच विवाह पूरी तरह नाममात्र का रहा, जिसमें न सहवास हुआ, न वैवाहिक संबंध स्थापित हुए और न ही सामाजिक या पारिवारिक मान्यता मिली।”

पीठ ने यह भी माना कि पति को परिवार से अलगाव का सामना करना पड़ा और पत्नी को भी समान परिस्थितियों का भय था। ये तथ्य कानून के तहत “असाधारण कठिनाई” की श्रेणी में आते हैं।

अदालत ने कहा कि जब दोनों पक्ष विवाह समाप्त करने पर सहमत हैं और संबंध वास्तव में कभी शुरू ही नहीं हुआ, तब एक वर्ष की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि पर जोर देना किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने विशेष विवाह अधिनियम की धारा 29 के तहत एक वर्ष की वैधानिक प्रतीक्षा अवधि माफ कर दी और आपसी सहमति से तलाक की याचिका पर सुनवाई की अनुमति दे दी।

साथ ही, मामले को फैमिली कोर्ट को वापस भेजते हुए निर्देश दिया गया कि वह एक वर्ष की अवधि पूरी होने की शर्त लगाए बिना प्रथम मोशन याचिका पर कानून के अनुसार शीघ्र निर्णय करे।

Case Details:

Case Title: Shahbaz Khan v. Komal Shresth

Case Number: MAT.APP.(F.C.) 60/2026

Judges: Justice Vivek Chaudhary and Justice Renu Bhatnagar

Decision Date: 29 May 2026

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