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दहेज के मामले में जेठानी के खिलाफ़ सिर्फ़ सामान्य आरोपों पर मुकदमा नहीं चल सकता: राजस्थान हाई कोर्ट ने कार्यवाही रद्द की

राजस्थान हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में जेठानी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए कहा कि शिकायत में केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाए गए थे, कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई। - श्रीमती इंद्रा देवी बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य।

Shivam Y.
दहेज के मामले में जेठानी के खिलाफ़ सिर्फ़ सामान्य आरोपों पर मुकदमा नहीं चल सकता: राजस्थान हाई कोर्ट ने कार्यवाही रद्द की

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दहेज उत्पीड़न मामले में आरोपी बनाई गई जेठानी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायत में उसके खिलाफ केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाए गए थे तथा कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई थी, इसलिए उसके खिलाफ मुकदमा जारी रखने का आधार नहीं बनता।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता इंद्रा देवी ने उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत भरतपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498A, 406, 323 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 4 और 6 के तहत संज्ञान लिया था। बाद में सत्र न्यायालय ने भी उस आदेश को बरकरार रखा था।

मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता का विवाह लाल सिंह से हुआ था। पति-पत्नी के बीच विवाद उत्पन्न होने के बाद तलाक और आपराधिक कार्यवाही शुरू हुई। पुलिस जांच के दौरान केवल पति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए गए और उसी के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया, जबकि इंद्रा देवी सहित अन्य रिश्तेदारों के संबंध में नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

बाद में शिकायतकर्ता ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत आवेदन दायर कर अन्य परिजनों को भी मुकदमे में शामिल करने की मांग की। पुनर्विचार के बाद मजिस्ट्रेट ने इंद्रा देवी सहित कुछ अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ संज्ञान ले लिया।

न्यायमूर्ति अनूप कुमार धांध ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता शिकायतकर्ता की जेठानी हैं। अदालत ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता और उसका पति दोनों सरकारी शिक्षक थे और अपने-अपने कार्यस्थलों पर रहते थे, जबकि याचिकाकर्ता अपने वैवाहिक घर में अलग रह रही थीं।

अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने भी याचिकाकर्ता की संलिप्तता नहीं पाई थी और उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया था।

फैसले में अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता के खिलाफ ऐसा कोई विशिष्ट कृत्य नहीं बताया गया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि उन्होंने किस प्रकार शिकायतकर्ता को दहेज की मांग के लिए प्रताड़ित किया या उसके साथ दुर्व्यवहार किया।”

हाईकोर्ट ने आगे कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सामान्य, सामूहिक और अस्पष्ट प्रकृति के हैं। रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्पष्ट आरोप नहीं है जिससे यह पता चले कि याचिकाकर्ता ने किस प्रकार शिकायतकर्ता को क्रूरता या उत्पीड़न का शिकार बनाया।

अदालत ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के प्रीति गुप्ता बनाम झारखंड राज्य फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें वैवाहिक विवादों में बिना ठोस आरोपों के कई रिश्तेदारों को आरोपी बनाने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की गई थी।

सभी तथ्यों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता।

अदालत ने 23 जनवरी 2023 को पारित मजिस्ट्रेट के संज्ञान आदेश तथा 26 जून 2023 के पुनरीक्षण न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही याचिका स्वीकार कर ली गई और लंबित सभी आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

Case Details:

Case Title: Smt. Indra Devi v. State of Rajasthan & Anr.

Case Number: S.B. Criminal Miscellaneous (Petition) No. 4161/2023

Judge: Justice Anoop Kumar Dhand

Decision Date: 01 May 2026

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