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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा में मां की कथित हिरासत में रह रही नाबालिग बच्ची की काउंसलिंग के आदेश दिए

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा आश्रम, सिरसा में मां की कथित गैरकानूनी हिरासत में रह रही नाबालिग बच्ची की पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से काउंसलिंग कराने का आदेश दिया। रिपोर्ट से माता-पिता के बीच कस्टडी का फैसला होगा।

Vivek G.
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा में मां की कथित हिरासत में रह रही नाबालिग बच्ची की काउंसलिंग के आदेश दिए

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि एक नाबालिग बच्ची, जो कथित तौर पर अपनी मां की गैरकानूनी हिरासत में डेरा सच्चा सौदा आश्रम, सिरसा में रह रही है, की तुरंत काउंसलिंग की जाए। कोर्ट ने कहा कि यह काउंसलिंग पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ द्वारा करवाई जाएगी ताकि बच्ची के कल्याण और अभिरक्षा (कस्टडी) का निर्धारण किया जा सके।

न्यायमूर्ति सुभाष मेहला ने सुनवाई के दौरान कहा:

"नाबालिग बच्ची की अभिरक्षा संबंधी मुद्दे पर काउंसलिंग करवाई जाए। एक काउंसलिंग शेड्यूल बनाया जाएगा और उसे याचिकाकर्ता के वकील तथा प्रतिवादी नंबर 4 (मां) के वकील को बताया जाएगा। काउंसलिंग का पूरा खर्च याचिकाकर्ता द्वारा वहन किया जाएगा।"

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कोर्ट ने आगे पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के निदेशक को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि पूरी प्रक्रिया केवल बच्ची के कल्याण का आकलन करने और माता-पिता के बीच कस्टडी तय करने तक ही सीमित रहे।

मामले की पृष्ठभूमि

हैबियस कॉर्पस याचिका बच्ची के पिता, जो गोवा के रहने वाले हैं, ने दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को उसकी मां ने डेरा सच्चा सौदा आश्रम, सिरसा में गैरकानूनी रूप से रोक रखा है। उन्होंने कहा कि यह आश्रम पहले से ही गंभीर विवादों और आपराधिक मामलों के लिए बदनाम है।

याचिका में कहा गया कि कई अदालतों से कस्टडी आदेश मिलने के बावजूद पिता को अब तक अपनी बेटी से स्वतंत्र रूप से मिलने या बात करने का अवसर नहीं मिला। उनका कहना है कि डेरा सच्चा सौदा के अधिकारी लगातार दखल देते हैं, जिसकी वजह से वह अपने अधिकारों का सही उपयोग नहीं कर पा रहे।

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पिता का दावा है कि वे आर्थिक रूप से सक्षम हैं और अपनी बेटी क्रिस्लिया को सुरक्षित घर, उचित शिक्षा और देखभाल दे सकते हैं। लेकिन मां और आश्रम के अधिकारियों के लगातार प्रभाव के कारण बच्ची को यही विश्वास है कि उसका एकमात्र घर डेरा सच्चा सौदा है।

पिता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह परेंस पैट्राईए अधिकारिता का उपयोग करते हुए परिवार न्यायालय अधिनियम, 1984 की धारा 12 की भावना में कार्य करे। उन्होंने कहा कि बच्ची की काउंसलिंग किसी योग्य मनोवैज्ञानिक से कराई जाए और उसके कल्याण, मानसिक स्थिति तथा सर्वोत्तम हित पर एक विशेषज्ञ रिपोर्ट तैयार की जाए।

उनका कहना था कि बच्ची अपनी स्वतंत्र इच्छा व्यक्त नहीं कर पा रही है और आश्रम में मानसिक दबाव में रह रही है।

डेरा सच्चा सौदा की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि याचिका में संस्था के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आरोप या राहत नहीं मांगी गई है, इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए।

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मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर तय करते हुए न्यायमूर्ति सुभाष मेहला ने निर्देश दिया:

"पीजीआईएमईआर द्वारा नियुक्त काउंसलर बच्ची की काउंसलिंग पूरी करने के बाद और आवश्यकता पड़ने पर माता-पिता से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट दाखिल करे। रिपोर्ट में यह बताया जाए कि क्या बच्ची अपने भले-बुरे को समझने की स्थिति में है और पिता या मां में से किसके साथ रहना चाहती है।"

केस का शीर्षक: साइप्रियानो ब्रिटो बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य

केस का प्रकार: बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (बाल हिरासत विवाद)

याचिकाकर्ता: साइप्रियानो ब्रिटो (पिता, गोवा निवासी)

प्रतिवादी: नाबालिग बच्चे की माँ

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