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राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश: वरिष्ठ रेजिडेंसी के लिए चयनित डॉक्टर को तुरंत रिलीव करें, करियर बाधित नहीं किया जा सकता

डॉ. विमला कुमावत बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य। राजस्थान हाईकोर्ट ने वरिष्ठ रेजिडेंसी के लिए चयनित डॉक्टर को रिलीव करने का आदेश दिया, कहा प्रशासनिक कारणों से उच्च शिक्षा नहीं रोकी जा सकती।

Vivek G.
राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश: वरिष्ठ रेजिडेंसी के लिए चयनित डॉक्टर को तुरंत रिलीव करें, करियर बाधित नहीं किया जा सकता

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वरिष्ठ रेजिडेंसी (Senior Residency) के लिए चयनित डॉक्टर को तुरंत कार्यमुक्त किया जाए ताकि वह निर्धारित समय पर कोर्स जॉइन कर सके। अदालत ने कहा कि केवल प्रशासनिक असुविधा या अस्थायी डॉक्टरों की कमी के आधार पर उच्च शिक्षा के अवसर को रोका नहीं जा सकता।

यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. नुपुर भाटी की एकल पीठ ने डॉ. विमला कुमावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

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मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता डॉ. विमला कुमावत वर्तमान में राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने इन-सर्विस उम्मीदवार के रूप में पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स पूरा करने के बाद एक वर्ष के वरिष्ठ रेजिडेंसी कोर्स के लिए आवेदन किया था।

अदालत को बताया गया कि 31 अक्टूबर 2025 की अधिसूचना के आधार पर उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया था और मेरिट के आधार पर उनका चयन भी हो गया। 28 जनवरी 2026 को जारी आदेश में उन्हें वरिष्ठ रेजिडेंसी कोर्स के लिए चयनित घोषित किया गया और उन्हें 24 फरवरी 2026 तक जॉइनिंग देनी थी।

हालांकि चयन होने के बावजूद विभाग ने उन्हें कार्यमुक्त (Relieve) नहीं किया, जिससे उनका करियर और शैक्षणिक प्रगति प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि वरिष्ठ रेजिडेंसी का अनुभव मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर बनने के लिए आवश्यक शर्तों में शामिल है।

वकील ने दलील दी कि NEET-PG परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार होती है और उसी आधार पर उनका चयन हुआ है। अगर उन्हें समय पर जॉइन करने की अनुमति नहीं दी गई, तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी, जिसकी भरपाई बाद में संभव नहीं होगी।

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उन्होंने यह भी कहा कि 5 जुलाई 2022 के सरकारी परिपत्र के अनुसार यदि किसी सरकारी डॉक्टर का चयन पीजी, डीएनबी या अन्य उच्च शिक्षा कार्यक्रम में होता है, तो संबंधित नियंत्रण अधिकारी उसे कार्यमुक्त करेगा ताकि वह कोर्स जॉइन कर सके। इसके बावजूद विभाग उन्हें रिलीव नहीं कर रहा है, जो अपनी ही नीति के खिलाफ है।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि डॉक्टरों की नियुक्ति जनहित और प्रशासनिक आवश्यकता के तहत की जाती है।

सरकार ने कहा कि लगभग 450 डॉक्टर वरिष्ठ रेजिडेंसी के लिए और करीब 800 डॉक्टर पोस्टग्रेजुएशन के लिए चयनित हुए हैं। यदि सभी डॉक्टरों को एक साथ रिलीव कर दिया गया, तो स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।

हालांकि अदालत ने यह भी नोट किया कि डॉक्टरों की कमी के दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस आंकड़ा या दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश नहीं किया गया।

अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि डॉक्टरों की उच्च शिक्षा केवल व्यक्तिगत लाभ का विषय नहीं है बल्कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत होती है।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले डॉ. रोहित कुमार बनाम सचिव, कार्यालय उपराज्यपाल, दिल्ली का उल्लेख करते हुए कहा:

“उच्च योग्यता प्राप्त डॉक्टर न केवल चिकित्सा क्षेत्र बल्कि पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति होते हैं। ऐसे डॉक्टर आगे चलकर बेहतर कौशल और विशेषज्ञता के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में योगदान देते हैं।”

अदालत ने यह भी कहा कि केवल प्रशासनिक असुविधा या अस्थायी कमी के आधार पर किसी डॉक्टर को उच्च शिक्षा के अवसर से वंचित करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

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अदालत का निर्णय

सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा।

साथ ही, अंतरिम राहत देते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 25 फरवरी 2026 तक कार्यमुक्त किया जाए ताकि वह 28 जनवरी 2026 के आवंटन पत्र के अनुसार वरिष्ठ रेजिडेंसी कोर्स जॉइन कर सके।

Case Title: Dr. Vimla Kumawat vs State of Rajasthan & Ors.

Case No.: S.B. Civil Writ Petition No. 4685/2026

Decision Date: 24 February 2026

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