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केवल दस्तावेज़ का पन्ना गायब या गलत जगह लग जाने से फैसले की समीक्षा नहीं हो सकती, जब तक उससे स्पष्ट अन्याय न हुआ हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने EWS भर्ती विवाद से जुड़ी एक समीक्षा याचिका (review plea) को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा शक्तियों का इस्तेमाल तथ्यों पर दोबारा बहस करने के लिए नहीं किया जा सकता और अपने पिछले फैसले में कोई स्पष्ट गलती नहीं पाई। - तपिश शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य

Shivam Y.
केवल दस्तावेज़ का पन्ना गायब या गलत जगह लग जाने से फैसले की समीक्षा नहीं हो सकती, जब तक उससे स्पष्ट अन्याय न हुआ हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सहायक ऑपरेटर (रेडियो कैडर) भर्ती से जुड़े एक मामले में दायर पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि किसी दस्तावेज़ का पन्ना मात्र छूट जाना या गलत तरीके से संलग्न होना अपने आप में पहले दिए गए फैसले की समीक्षा का आधार नहीं बनता, जब तक यह साबित न हो कि उससे स्पष्ट रूप से न्याय में गंभीर चूक हुई है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ने वर्ष 2022 में सहायक ऑपरेटर (रेडियो कैडर) के पद के लिए आवेदन किया था। उसका दावा था कि उसने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का वैध प्रमाणपत्र ऑनलाइन आवेदन के साथ अपलोड किया था और उसके अंक अंतिम चयनित EWS अभ्यर्थी से अधिक थे। इसके बावजूद उसे EWS श्रेणी का लाभ नहीं दिया गया।

याचिकाकर्ता का यह भी आरोप था कि उसकी मूल रिट याचिका की सुनवाई के दौरान लिखित निर्देशों का एक महत्वपूर्ण पृष्ठ, जिसमें उसका EWS प्रमाणपत्र था, अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इसी कारण अदालत ने गलत तथ्यात्मक आधार पर रिट याचिका खारिज कर दी।

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने कहा कि अभ्यर्थी ने मूल ऑनलाइन आवेदन में स्वयं को अनारक्षित (UR) श्रेणी में दर्ज किया था। साथ ही, उसके द्वारा अपलोड किया गया EWS प्रमाणपत्र निर्धारित प्रारूप में नहीं था। राज्य ने यह भी कहा कि रिव्यू याचिका के माध्यम से पहले से तय विवाद पर दोबारा सुनवाई नहीं कराई जा सकती।

अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार ने कहा कि पुनर्विचार का अधिकार बहुत सीमित है। इसका उपयोग केवल तभी किया जा सकता है जब रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि हो या कानून द्वारा मान्य अन्य आधार मौजूद हों।

पीठ ने कहा, “रिव्यू अपील का विकल्प नहीं है और इसके माध्यम से साक्ष्यों का दोबारा मूल्यांकन या मामले की पुनः सुनवाई नहीं की जा सकती।”

दस्तावेज़ के कथित गायब पृष्ठ के संबंध में अदालत ने संबंधित अधिकारी को तलब कर मूल रिकॉर्ड की जांच कराई। जांच में पाया गया कि जिन पृष्ठों के गायब होने का दावा किया गया था, वे मूल रिकॉर्ड में उपलब्ध थे और रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य दस्तावेज़ों से मेल खाते थे।

अदालत ने कहा, “किसी दस्तावेज़ का पृष्ठ छूट जाना, गलत जगह लग जाना या संलग्न न होना मात्र इस आधार पर समीक्षा का कारण नहीं बन सकता, जब तक यह न दिखाया जाए कि उससे रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि हुई या न्याय का गंभीर हनन हुआ।”

पीठ ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने आवेदन अनारक्षित श्रेणी में किया था और उसका EWS प्रमाणपत्र निर्धारित प्रारूप में नहीं था। इसलिए अदालत को ऐसा कोई कारण नहीं मिला जिससे यह कहा जा सके कि उसे किसी प्रकार की वास्तविक कानूनी क्षति हुई।

फैसला

सभी तथ्यों और मूल रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व निर्णय में ऐसी कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है, जिसके आधार पर पुनर्विचार किया जा सके। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता के तर्क विवादित तथ्यों की दोबारा जांच की मांग करते हैं, जो रिव्यू क्षेत्राधिकार के दायरे में नहीं आता।

इन्हीं कारणों से अदालत ने पुनर्विचार याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।

Case Details

Case Title: Tapish Sharma v. State of U.P. and Others

Case Number: Civil Misc. Review Application No. 65 of 2025

Judge: Justice Karunesh Singh Pawar

Decision Date: 10 June 2026

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