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व्यावसायिक मात्रा वाले हेरोइन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की जमानत, कहा- NDPS Act की धारा 37 की अनदेखी नहीं की जा सकती

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा NDPS मामले में दी गई जमानत रद्द करते हुए कहा कि व्यावसायिक मात्रा के मामलों में धारा 37 की अनिवार्य शर्तों का पालन जरूरी है। - पंजाब राज्य बनाम बलराज सिंह @ बिल्ला

CB News Desk
व्यावसायिक मात्रा वाले हेरोइन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की जमानत, कहा- NDPS Act की धारा 37 की अनदेखी नहीं की जा सकती

सुप्रीम कोर्ट ने हेरोइन तस्करी से जुड़े एक मामले में आरोपी को दी गई जमानत रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थ और मनोरोगी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के तहत व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) वाले मामलों में धारा 37 की अनिवार्य शर्तों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि इन शर्तों पर विचार किए बिना जमानत देना कानून के अनुरूप नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 10 जनवरी 2024 को पंजाब में दर्ज एक FIR से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, वाहन जांच के दौरान दो व्यक्तियों के कब्जे से 1.465 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। जांच के दौरान सह-आरोपियों ने कथित रूप से खुलासा किया कि बलराज सिंह उर्फ बिल्ला ने उन्हें हेरोइन एकत्र कर आगे आपूर्ति करने के निर्देश दिए थे। उस समय वह जेल में बंद था। इसके बाद उसे भी मामले में आरोपी बनाया गया।

विशेष अदालत, तरनतारन ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2025 में उसे नियमित जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति नोंगमेकापम कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय NDPS Act की धारा 37 में निर्धारित "दोहरी शर्तों" (Twin Conditions) पर विचार ही नहीं किया।

पीठ ने कहा,

“व्यावसायिक मात्रा से जुड़े मामलों में धारा 37 के तहत निर्धारित शर्तों पर विचार करना अनिवार्य है।” अदालत ने पाया कि हाईकोर्ट के आदेश में इन शर्तों के संबंध में कोई चर्चा नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपी के खिलाफ इसी प्रकार के NDPS मामलों से जुड़े पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद हैं। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि जमानत पर रिहा होने के बाद उसके द्वारा दोबारा अपराध किए जाने की संभावना नहीं है।

लंबी अवधि की हिरासत के तर्क पर अदालत ने कहा कि आरोपी लगभग एक वर्ष सात महीने से जेल में था, जबकि दोषसिद्धि की स्थिति में उसे अधिकतम 20 वर्ष तक की सजा हो सकती है। इसलिए इसे इतनी लंबी हिरासत नहीं माना जा सकता कि केवल उसी आधार पर जमानत दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की अपील स्वीकार करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को पारित जमानत आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि मामले के तथ्यों और NDPS Act की धारा 37 के तहत लागू प्रतिबंधों को देखते हुए आरोपी जमानत का हकदार नहीं है।

इसके साथ ही लंबित सभी आवेदन भी खारिज कर दिए गए।

Case Details

Case Title: State of Punjab v. Balraj Singh @ Billa

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 896 of 2026

Judge: Justice Sanjay Karol and Justice Nongmeikapam Kotiswar Singh

Decision Date: June 2, 2026

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