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डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की, राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग

डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने और GSI और ASI से सर्वेक्षण कराने की मांग की।

Vivek G.
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की, राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग

पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि उनकी उस अपील पर निर्णय लिया जाए जिसमें राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की माँग की गई है। इसके साथ ही, उन्होंने राम सेतु को राष्ट्रीय महत्व का प्राचीन स्मारक घोषित करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) से सर्वेक्षण की भी माँग की है।

डॉ. स्वामी ने यह जनहित याचिका दायर करते हुए कहा है कि राम सेतु सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का केंद्र है। याचिका में कहा गया है, "यह पुरातात्विक स्थल आस्था और श्रद्धा का विषय है, लोग राम सेतु को तीर्थस्थल मानते हैं।" उन्होंने कहा कि सरकार का कर्तव्य है कि वह राम सेतु को किसी भी प्रकार की क्षति, प्रदूषण या अपवित्रता से बचाए।

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डॉ. स्वामी की पहले दायर एक अन्य याचिका जिसमें केंद्र सरकार को सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना के लिए वैकल्पिक मार्ग ढूँढने का निर्देश देने की मांग की गई थी, अब भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस परियोजना के तहत 83 किलोमीटर लंबी चैनल बनाई जानी थी, जो मन्नार और पाक जलडमरूमध्य को जोड़ती, जिससे राम सेतु के क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई गई।

जनवरी 2023 में कोर्ट ने इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई की थी जिसमें राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट को बताया कि राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की प्रक्रिया संस्कृति मंत्रालय में चल रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने डॉ. स्वामी को सलाह दी थी कि वे मंत्रालय के समक्ष अपनी अपील प्रस्तुत करें। इसके बाद कोर्ट ने आवेदन को खारिज कर दिया लेकिन डॉ. स्वामी को यह स्वतंत्रता दी कि यदि वे मंत्रालय के फैसले से असंतुष्ट हों तो वे कानूनी उपाय अपना सकते हैं।

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इसके बाद, डॉ. स्वामी ने 27 जनवरी 2023 और 13 मई 2025 को अपनी अपील प्रस्तुत की, लेकिन उनका कहना है कि अब तक मंत्रालय की ओर से उन्हें या कोर्ट को कोई निर्णय नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व मामले में केंद्र सरकार ने जवाबी हलफनामा दायर नहीं किया और जब हलफनामा दाखिल किया गया, तो उसे वापस ले लिया गया।

पृष्ठभूमि

राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग सबसे पहले डॉ. स्वामी ने 2007 में सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना के खिलाफ दायर अपनी याचिका में उठाई थी। इस परियोजना के तहत 83 किलोमीटर लंबी चैनल बनाई जानी थी जो मन्नार और पाक जलडमरूमध्य को जोड़ती और जिससे राम सेतु पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई थी।

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राम सेतु एक प्राकृतिक पुल है जो तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट के पास स्थित है। यह पंबन द्वीप (रामेश्वरम) से मन्नार द्वीप (श्रीलंका के उत्तरी तट) तक फैला है। रामायण में इस पुल का उल्लेख है कि इसे भगवान राम ने लंका पहुँचने और सीता माता को बचाने के लिए बनवाया था।

डॉ. स्वामी की याचिका अधिवक्ता सत्य सभरवाल और पलक बिश्नोई द्वारा तैयार की गई है।

"यह पुरातात्विक स्थल आस्था और श्रद्धा का विषय है, लोग राम सेतु को तीर्थस्थल मानते हैं।" – डॉ. स्वामी की याचिका।

केस का शीर्षक: डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ और अन्य।

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