इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में गुरुवार को एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त रुख अपनाया। मामला मूल दस्तावेज वापस न करने से जुड़ा था। अदालत ने साफ कहा कि तकनीकी वजहों का सहारा लेकर किसी व्यक्ति को परेशान नहीं किया जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका डॉ. अजय मंडलोई द्वारा दायर की गई थी। उनका आरोप था कि 19 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने मूल दस्तावेज लौटाने का आदेश दिया था, लेकिन संबंधित अधिकारी ने जानबूझकर उस आदेश का पालन नहीं किया।
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याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने दलील दी कि अदालत के स्पष्ट निर्देश के बावजूद दस्तावेज वापस नहीं किए गए। इससे न केवल आदेश की अवहेलना हुई, बल्कि याचिकाकर्ता को अनावश्यक परेशानी भी झेलनी पड़ी।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की एकल पीठ ने आदेश का अवलोकन किया। अदालत ने कहा कि पहले आदेश में यह उल्लेख था कि प्रतिवादी क्रमांक 3 दस्तावेज लौटाएंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि मूल दस्तावेज प्रतिवादी क्रमांक 2 - यानी चिकित्सा शिक्षा निदेशक - के पास हैं।
पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह कहने की आवश्यकता नहीं कि मूल दस्तावेज प्रतिवादी क्रमांक 2 के पास हैं। जब उन्हें यह जानकारी थी, तो केवल तकनीकी कारणों से याचिकाकर्ता को परेशान नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि अधिकारी के पास दस्तावेज थे, तो उन्हें स्वयं आगे बढ़कर आदेश का पालन करना चाहिए था।
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अदालत का आदेश
हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक, जो इस अवमानना याचिका में प्रतिवादी क्रमांक 2 और कथित अवमाननाकर्ता हैं, को निर्देश दिया कि वे हर हाल में 2 मार्च 2026 तक मूल दस्तावेज याचिकाकर्ता को लौटा दें।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि तय समयसीमा में दस्तावेज वापस नहीं किए गए, तो आगे अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।
मामले को अब 9 मार्च 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में दोबारा सूचीबद्ध किया गया है।
Case Title: Dr. Ajay Mandloi vs Dr. Aruna Kumar
Case No.: CONC No. 1497 of 2026
Decision Date: 27 February 2026










