सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की सटीक परिभाषा तय करने से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। अदालत ने कहा कि इस विषय पर विस्तृत अध्ययन और विशेषज्ञ राय जरूरी है, इसलिए समिति के गठन की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) याचिका से जुड़ा है, जिसमें अरावली हिल्स और अरावली रेंज की स्पष्ट परिभाषा और उनसे जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर विचार किया जा रहा है। अदालत की पहले की सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता और अमिकस क्यूरी (कोर्ट के सहायक) को विस्तृत नोट और संभावित कानूनी सवाल तैयार करने के लिए कहा गया था।
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कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अरावली क्षेत्र की पहचान के लिए पर्यावरण, भू-आकृति और वन क्षेत्र जैसे पहलुओं पर विशेषज्ञ राय बेहद महत्वपूर्ण होगी।
पीठ ने कहा, “अरावली हिल्स और अरावली रेंज की पहचान, उनका कुल विस्तार, ढलान और वन क्षेत्र जैसे पहलुओं पर पर्यावरण मंत्रालय की राय अदालत के लिए महत्वपूर्ण सहायता होगी।”
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मंत्रालय विशेषज्ञों का एक पैनल सुझाए। साथ ही अमिकस क्यूरी और अन्य वकीलों से भी योग्य विशेषज्ञों के प्रोफाइल देने को कहा गया।
अदालत का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को अपने लिखित सुझाव 10 मार्च 2026 तक दाखिल करने का समय दिया है। अदालत ने साफ किया कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा ताकि कार्यवाही में अनावश्यक देरी न हो।
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निर्णय
अदालत ने फिलहाल अरावली क्षेत्र से जुड़े सभी गतिविधियों, विशेषकर खनन कार्यों पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही मामले को 12 मार्च 2026 को सूचीबद्ध करते हुए विशेषज्ञ समिति के गठन और आगे के मुद्दों पर विचार करने का फैसला किया।
Case Title: In Re: Definition of Aravalli Hills and Ranges and Ancillary Issues
Case No.: Suo Motu Writ Petition (Civil) No. 10/2025
Decision Date: 26 February 2026










