पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनूप चितकारा और न्यायमूर्ति मनदीप पन्नू की पीठ ने 2018 के गुरुग्राम फिरौती अपहरण मामले में दोषी अमित राणा उर्फ मीता की सज़ा पर रोक लगा दी है। उसे आईपीसी की धारा 364-A के तहत आजीवन कारावास के साथ-साथ धारा 307, 397, 482 और 34 के तहत अन्य सज़ाएँ सुनाई गई थीं।
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अभियोजन के अनुसार, 17 मई 2018 को पुलिस को घोड़ा चौक, गुरुग्राम में अपहरण और फिरौती की मांग की सूचना मिली। शिकायतकर्ता उपेंद्र ने बताया कि उनके भतीजे प्रदीप सिंह का अपहरण कर लिया गया था और अपहरणकर्ताओं ने ₹50,000 की फिरौती मांगी। उन्होंने ₹20,000 की व्यवस्था कर हीरो होंडा चौक पर आरोपियों को सौंपे। आरोपियों ने दावा किया कि उन्होंने प्रदीप के पैर में गोली मारी है और उसे भोंडसी जेल रोड के पास छोड़ दिया है। बाद में प्रदीप सेक्टर 62, गुरुग्राम के पास घायल अवस्था में मिला और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जांच के दौरान अमित राणा और एक अन्य आरोपी अजय को आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज एक अन्य एफआईआर में गिरफ्तार किया गया। उनके खुलासे पर फिरौती की कुछ रकम बरामद की गई। ट्रायल कोर्ट ने अमित राणा को धारा 364-A आईपीसी के तहत आजीवन कारावास, धारा 307 आईपीसी के तहत 10 वर्ष और अन्य सजाएं सुनाईं।
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बीएनएसएस, 2023 की धारा 430 के तहत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नोट किया कि राणा पहले ही 8 साल से ज्यादा जेल में रह चुका है, फिरौती की रकम ₹50,000 थी और गोली का घाव शरीर के गैर-जरूरी हिस्से (जांघ) पर था। अपील के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना कोर्ट ने अपील के लंबित रहने तक सजा पर रोक लगाते हुए जमानत की शर्तें तय कीं।
"कैद की सजा पर आगे के आदेश तक रोक लगाई जाती है," पीठ ने कहा और यह भी निर्देश दिया कि तेजी से रिहाई सुनिश्चित करने के लिए जमानत आदेश की डाउनलोड कॉपी स्वीकार की जाएगी।
केस का शीर्षक:- अमित राणा @ मीता बनाम हरियाणा राज्य
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