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पंजाब एवं हरियाणा HC ने अनजाने में हुई देरी के कारण मुआवजे की समय सीमा में संशोधन किया

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने नथू राम केस में अपने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए ₹6 लाख मुआवजे में देरी के कारण ब्याज की शर्त में बदलाव किया।

Vivek G.
पंजाब एवं हरियाणा HC ने अनजाने में हुई देरी के कारण मुआवजे की समय सीमा में संशोधन किया

हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने RA-LP No. 26 of 2025 in LPA No. 1782 of 2018 में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाया, जो कि याचिकाकर्ता नथू राम और नियोक्ता (उत्तरदाता नंबर 2) के बीच था। इस याचिका में कोर्ट ने 12.09.2024 के अपने पुराने फैसले में आंशिक संशोधन किया।

यह मामला माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री शील नागू और माननीय न्यायमूर्ति श्री संजीव बेरी की पीठ के समक्ष आया।

मामले की पृष्ठभूमि

12 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि नियोक्ता नथू राम को पुनर्नियुक्ति के बदले ₹6 लाख मुआवजा अदा करे। यह भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाना था, अन्यथा 13.08.2009 से 8% वार्षिक ब्याज लगेगा।

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“यह राशि आज से 30 दिनों के भीतर कार्यकर्ता को दी जानी चाहिए, अन्यथा इस पर 13.08.2009 से 8% वार्षिक ब्याज लागू होगा।” — मूल आदेश दिनांक 12.09.2024

उत्तरदाता नंबर 2 ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करते हुए कहा कि संबंधित क्लर्क का तबादला होने के कारण आदेश की अनुपालना समय पर नहीं हो सकी। जैसे ही उन्हें आदेश की जानकारी मिली, उन्होंने 19.02.2025 को ₹6 लाख का चेक याचिकाकर्ता के वकील को सौंप दिया।

हालाँकि, याचिकाकर्ता के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जब 12.09.2024 को फैसला सुनाया गया था, उस समय उत्तरदाता का वकील अदालत में मौजूद था। इसलिए आदेश की जानकारी ना होने का दावा गलत है।

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कोर्ट ने माना कि उत्तरदाता के वकील आदेश के समय उपस्थित थे, इसलिए जानकारी ना होने का दावा मान्य नहीं है। लेकिन चूंकि मुआवजा अंततः चुका दिया गया, इसलिए कोर्ट ने ब्याज की शर्त में संशोधन कर दिया।

अब, यदि ₹6 लाख की राशि 30 दिनों के भीतर नहीं दी जाती है, तो 8% वार्षिक ब्याज 12.09.2024 से लागू होगा, न कि मूल पुरस्कार दिनांक 13.08.2009 से।

“यह राशि आज से 30 दिनों के भीतर कार्यकर्ता को दी जानी चाहिए, अन्यथा इस पर 12.09.2024 से 8% वार्षिक ब्याज लागू होगा।” — संशोधित खंड दिनांक 31.07.2025

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इस संशोधन के साथ ही कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका का निस्तारण कर दिया। यह फैसला प्रक्रिया की देरी को ध्यान में रखते हुए नियोक्ता को राहत प्रदान करता है, जबकि यथासंभव न्यायिक संतुलन भी बनाए रखता है।

केस का शीर्षक: नाथू राम बनाम पीठासीन अधिकारी, श्रम न्यायालय एवं अन्यकेस संख्या: आरए-एलपी संख्या 26/2025, एलपीए संख्या 1782/2018 मेंआरक्षित तिथि: 25 जुलाई 2025घोषित तिथि: 31 जुलाई 2025याचिकाकर्ता: नाथू रामप्रतिवादी: 1. पीठासीन अधिकारी, श्रम न्यायालय 2. नियोक्ता (निजी/कंपनी - आदेश में विशिष्ट नाम का उल्लेख नहीं है)

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