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बिजली तार से मौत मामले में PGVCL को झटका: गुजरात हाईकोर्ट ने ₹3.38 लाख मुआवजा बरकरार रखा

पश्चिम गुजरात विज कंपनी लिमिटेड बनाम हसम ममद समा और अन्य। गुजरात हाईकोर्ट ने बिजली तार से मौत मामले में PGVCL की अपील खारिज कर ₹3.38 लाख मुआवजा बरकरार रखा, सख्त जिम्मेदारी सिद्धांत लागू किया।

Vivek G.
बिजली तार से मौत मामले में PGVCL को झटका: गुजरात हाईकोर्ट ने ₹3.38 लाख मुआवजा बरकरार रखा

गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में बिजली कंपनी की जिम्मेदारी तय करते हुए मृतक के परिवार को दिए गए मुआवजे को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि बिजली आपूर्ति जैसी खतरनाक गतिविधियों में कंपनियों पर सख्त जिम्मेदारी (Strict Liability) लागू होती है और वे दुर्घटना से बचने के लिए पूरी सावधानी बरतने के लिए बाध्य हैं।

इस मामले में अदालत ने बिजली कंपनी Paschim Gujarat Vij Company Ltd (PGVCL) की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत द्वारा दिए गए मुआवजे के आदेश को कायम रखा।

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला कच्छ जिले के भरासर गांव का है। मृतक अब्दुल हसम अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था और रोज़ाना मजदूरी पर प्लंबर का काम करता था।

6 दिसंबर 2001 को वह गांव के एक तालाब के किनारे से गुजर रहा था। इसी दौरान वह बिजली कंपनी के एक ढीले और लटकते हुए जीवित तार के संपर्क में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

मृतक के माता-पिता ने अदालत में दावा किया कि यह दुर्घटना बिजली कंपनी की लापरवाही के कारण हुई। उन्होंने करीब ₹5.62 लाख मुआवजे की मांग की थी।

भुज की चौथी अतिरिक्त सीनियर सिविल जज अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों को देखते हुए पाया कि दुर्घटना बिजली लाइन की खराब स्थिति के कारण हुई थी।

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अदालत ने आंशिक रूप से दावा स्वीकार करते हुए बिजली कंपनी को मृतक के परिवार को ₹3,38,000 मुआवजा 9% वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया।

इस फैसले को चुनौती देते हुए PGVCL ने गुजरात हाईकोर्ट में प्रथम अपील दाखिल की।

बिजली कंपनी की ओर से दलील दी गई कि दुर्घटना मृतक की अपनी लापरवाही के कारण हुई।

कंपनी के वकील ने अदालत को बताया कि यदि मृतक सावधानी बरतता तो यह हादसा टाला जा सकता था। इस आधार पर निचली अदालत द्वारा तय की गई लापरवाही और मुआवजे के आदेश को गलत बताया गया।

न्यायमूर्ति जे.सी. दोषी की पीठ ने मामले की परिस्थितियों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति जैसी गतिविधियां स्वभाव से खतरनाक होती हैं।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में Absolute Liability का सिद्धांत लागू होता है।

पीठ ने कहा:

“जब कोई संस्था खतरनाक गतिविधि करती है, तो यह उसकी जिम्मेदारी है कि उससे किसी को नुकसान न पहुंचे। दुर्घटना होने पर कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।”

अदालत ने यह भी पाया कि घटना के समय बिजली का तार नीचे की ओर लटका हुआ था और उसी के संपर्क में आने से व्यक्ति की मौत हुई।

पीठ ने कहा कि ऐसे हालात में बिजली कंपनी मृतक की लापरवाही का हवाला देकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

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सभी तथ्यों और कानून के सिद्धांतों पर विचार करने के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने बिजली कंपनी की अपील खारिज कर दी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला सही है और उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

इसके साथ ही अदालत ने कहा कि यदि मुआवजे की राशि ट्रायल कोर्ट में जमा है तो उसे ब्याज सहित मृतक के परिवार को जारी किया जाए।

Case Title: Paschim Gujarat Vij Co. Ltd. vs Hasam Mamad Sama & Anr.

Case No.: R/First Appeal No. 3505 of 2007

Decision Date: 10 March 2026

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