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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: दिव्यांग उम्मीदवारों को राहत, SSC को 2 हफ्ते में भेजने होंगे डोज़ियर; CAG करेगा नियुक्ति पर विचार

सुधांशु कर्दम बनाम भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक एवं अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने SSC को 2 हफ्ते में डोज़ियर भेजने का आदेश दिया, ताकि दिव्यांग उम्मीदवारों को CAG में उपयुक्त ग्रुप C पदों पर नियुक्ति के लिए विचार किया जा सके।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: दिव्यांग उम्मीदवारों को राहत, SSC को 2 हफ्ते में भेजने होंगे डोज़ियर; CAG करेगा नियुक्ति पर विचार

सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग उम्मीदवारों की नियुक्ति से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए उपयुक्त पद बाद में चिन्हित किए गए हों, तो योग्य उम्मीदवारों को पूरी तरह से बाहर नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने Staff Selection Commission (SSC) को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर संबंधित उम्मीदवारों के डोज़ियर Comptroller and Auditor General of India (CAG) को भेजे, ताकि उन्हें उपयुक्त ग्रुप ‘C’ पदों पर नियुक्ति के लिए विचार किया जा सके।

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला SSC की Combined Graduate Level Examination 2018 से जुड़ा है। इस भर्ती प्रक्रिया में ऑडिटर के पद के लिए कुछ रिक्तियां Persons with Disabilities (PwD) श्रेणी के लिए आरक्षित थीं।

उम्मीदवार अमित यादव ने ‘मेंटल इलनेस’ श्रेणी में आवेदन किया था और परीक्षा के सभी चरणों—टियर-I, टियर-II और टियर-III-सफलतापूर्वक पास कर लिए। इसके बाद उन्हें दस्तावेज़ सत्यापन और अंतिम चयन के लिए बुलाया गया।

हालांकि, बाद में CAG कार्यालय ने यह कहते हुए उनका डोज़ियर लौटा दिया कि ऑडिटर का पद ‘मेंटल इलनेस’ श्रेणी के दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। इसके चलते उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।

इस फैसले को चुनौती देते हुए उम्मीदवार ने Central Administrative Tribunal (CAT) में याचिका दायर की।

CAT और हाईकोर्ट में क्या हुआ

CAT ने जनवरी 2023 में उम्मीदवार के पक्ष में फैसला दिया और CAG को निर्देश दिया कि एक मेडिकल बोर्ड बनाकर उम्मीदवार की कार्यक्षमता की जांच की जाए। यदि वह पद के लिए सक्षम पाया जाता है, तो उसे नियुक्ति दी जाए।

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लेकिन बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया और CAG द्वारा उम्मीदवार का डोज़ियर लौटाने के फैसले को बहाल कर दिया।

इसी दौरान एक अन्य दिव्यांग उम्मीदवार सुधांशु कर्दम, जो समान स्थिति में थे, ने भी मामले में हस्तक्षेप किया और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अहम पहलू

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने 4 जनवरी 2021 की एक सरकारी अधिसूचना का मुद्दा आया। इस अधिसूचना में कई सरकारी पदों को विभिन्न दिव्यांग श्रेणियों के लिए उपयुक्त घोषित किया गया था।

सरकार की ओर से दायर अतिरिक्त हलफनामे में बताया गया कि बाद में ग्रुप ‘C’ के कुछ पद, जैसे Assistant (Audit) और Auditor-II, को ‘Specific Learning Disability’ और ‘Mental Illness’ श्रेणी के दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए उपयुक्त माना गया है।

हलफनामे में यह भी कहा गया कि यदि SSC उम्मीदवारों के डोज़ियर भेजता है, तो CAG उन्हें इन उपयुक्त पदों पर समायोजित करने के लिए तैयार है।

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कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने रिकॉर्ड पर आए हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि अब दोनों उम्मीदवारों को समायोजित करने में कोई बाधा नहीं रह गई है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए SSC को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।

पीठ ने कहा कि संबंधित उम्मीदवारों के डोज़ियर CAG को भेजे जाने के बाद उन्हें उपयुक्त ग्रुप ‘C’ पदों पर नियुक्ति के लिए विचार किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश

अदालत ने SSC को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर सुधांशु कर्दम और अमित यादव दोनों के डोज़ियर CAG को भेजे।

इसके बाद CAG को निर्देश दिया गया कि वह उन्हें उन ग्रुप ‘C’ पदों पर नियुक्ति के लिए विचार करे जो उनकी दिव्यांगता के लिए उपयुक्त घोषित किए गए हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि 2018 की भर्ती के तहत विज्ञापित पद पहले ही भर चुके हों, तो दोनों उम्मीदवारों को समायोजित करने के लिए सुपरन्यूमरेरी (अतिरिक्त) पद बनाए जा सकते हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति की प्रभावी तिथि उम्मीदवारों के जॉइनिंग की तारीख से मानी जाएगी।

इन्हीं निर्देशों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अपील का निपटारा कर दिया।

Case Title: Sudhanshu Kardam v. Comptroller and Auditor General of India & Ors.

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) Diary No. 43728 of 2025

Decision Date: 12 March 2026

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