चंडीगढ़ स्थित Society for Prevention of Cruelty to Animals (SPCA) में जानवरों की देखभाल को लेकर उठे सवालों पर अदालत ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत के समक्ष पेश रिपोर्ट और तस्वीरों में कुत्तों के भोजन और देखभाल को लेकर कई खामियां सामने आईं। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए कि आश्रय स्थल में रखे जानवरों की उचित देखभाल हो।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला शौर्य मदन बनाम निशांत कुमार यादव एवं अन्य और सहजीवी फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट बनाम निशांत कुमार यादव एवं अन्य का मामला कोर्ट के सामने आया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि SPCA शेल्टर में जानवरों की देखभाल ठीक तरह से नहीं हो रही है और कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं दिया गया, जिसके कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर ने भी अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें शेल्टर की स्थिति और जानवरों के भोजन से जुड़ी तस्वीरें शामिल थीं।
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि प्रशासन ने SPCA को वित्तीय सहायता के तौर पर 8 मई 2025 को ₹50 लाख और 13 नवंबर 2025 को ₹70 लाख जारी किए थे। इसके बाद राशि का उपयोग करना SPCA की जिम्मेदारी थी।
SPCA की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कुछ प्रशासनिक कारणों से कर्मचारियों का वेतन जारी होने में देरी हुई, लेकिन जनवरी 2026 का वेतन जारी कर दिया गया है और फरवरी का वेतन जल्द जारी किया जाएगा।
लोकल कमिश्नर की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शेल्टर में कुत्तों को चावल, अंडे और दलिया खिलाया जा रहा है, लेकिन उनकी पोषण आवश्यकताएं पूरी नहीं हो रहीं। अदालत में मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि लगभग 20 किलो वजन के एक कुत्ते को प्रतिदिन करीब 150 ग्राम प्रोटीन, यानी लगभग 4 से 5 अंडों की जरूरत होती है।
हालांकि शेल्टर में कुल 47 कुत्तों के लिए सुबह और शाम के भोजन में केवल 45–47 अंडे मिलाए जा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि “कुत्तों की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं हो रहीं।”
सुनवाई के दौरान यह भी तय किया गया कि शेल्टर में एक समय में अधिकतम पांच स्वयंसेवकों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। स्वयंसेवकों को केवल अपना नाम, दो फोटो और पहचान पत्र देना होगा और वे तय समय के अनुसार काम कर सकेंगे।
फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच करने की अनुमति होगी। यदि कोई स्वयंसेवक अनुशासनहीन व्यवहार करता है तो उसे परिसर में प्रवेश से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
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अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि शेल्टर में लगे CCTV कैमरे लगातार चालू रहें और उनका रिकॉर्ड कम से कम एक महीने तक सुरक्षित रखा जाए।
अदालत ने आदेश दिया कि लोकल कमिश्नर को CCTV फुटेज तक पूरी पहुंच दी जाए ताकि वह SPCA के कामकाज और जानवरों की देखभाल पर नजर रख सकें।
साथ ही न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यह फुटेज याचिकाकर्ताओं को नहीं दी जाएगी और न ही इसे सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा किया जाएगा।
अदालत ने SPCA को निर्देश दिया कि वह एक हलफनामा दाखिल कर बताए कि जानवरों की पोषण जरूरतें पूरी करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को तय की गई।










