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सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे को शिक्षा खर्च के लिए सीधे बॉम्बे हाई कोर्ट से राशि मांगने की अनुमति दी, कहा-SLP से मुख्य मामले की सुनवाई नहीं रुकेगी

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे को शिक्षा खर्च के लिए सीधे बॉम्बे हाई कोर्ट से राशि मांगने की अनुमति दी, कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जारी रखने का रास्ता खुला।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे को शिक्षा खर्च के लिए सीधे बॉम्बे हाई कोर्ट से राशि मांगने की अनुमति दी, कहा-SLP से मुख्य मामले की सुनवाई नहीं रुकेगी

नई दिल्ली, 3 नवंबर: सोमवार को हुई एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि उदीता नाभा और उनके पृथक रह रहे पति रंजीत नाभा के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के मुख्य अपीलों पर बॉम्बे हाई कोर्ट की सुनवाई पर लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सुनवाई कुछ ही मिनट चली, लेकिन पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि लंबित SLP “मुख्य अपीलों की सुनवाई में बाधा नहीं बनेगी।”

पृष्ठभूमि

यह मामला कई मंचों पर वर्षों से खिंच रहा है और इसमें दोनों पक्षों के बीच वित्तीय जिम्मेदारियों और व्यवस्थाओं पर विवाद शामिल है। सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी किया था, जिसका पालन याचिकाकर्ता पक्ष को करना था। सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने, जो उदीता नाभा की ओर से पेश हुए, अदालत को बताया कि उस आदेश का अनुपालन कर दिया गया है, लेकिन अब एक नया वित्तीय आवश्यकता सामने आई है।

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विवाद का एक बड़ा हिस्सा अब यूएसडी 40,257 - लगभग ₹35 लाख - की राशि पर केंद्रित है, जो प्रतिवादी संख्या 2, नाइआ/नलिन की शिक्षा और रहने के खर्चों के लिए आवश्यक है।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि ₹8.25 करोड़ की रकम पहले ही रंजीत नाभा द्वारा हाई कोर्ट में जमा की गई थी, जिसमें से ₹2 करोड़ पहले ही याचिकाकर्ता को जारी किए जा चुके हैं।

अदालत की टिप्पणियाँ

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ का मुख्य ध्यान इस बात पर दिखा कि चल रहे कानूनी विवादों के बीच बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो। एक मौक़े पर पीठ ने कहा, “यह विशेष अनुमति याचिका लंबित होने के बावजूद हाई कोर्ट मुख्य अपीलों का निपटारा करने से नहीं रुकेगा।”

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जब चर्चा शिक्षा खर्च पर आई, पीठ ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी की ओर से आए भुगतान की मांग से संबंधित याचिकाकर्ता के पक्ष की चिंताओं को ध्यान से सुना। न्यायाधीशों ने हाई कोर्ट में जमा राशि का भी संज्ञान लिया और संकेत दिया कि मामला बिना देरी के सुलझाया जा सकता है।

अदालत ने एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी की, “यह व्यवस्था केवल नाइआ/नलिन की शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए है, जब तक मुख्य विवाद का निपटारा नहीं हो जाता।”

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या 2 के लिंग उल्लेख को लेकर कुछ क्षणों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा हुई, लेकिन पीठ ने उस पर अधिक समय नहीं गंवाया और सीधे वित्तीय प्रक्रिया पर वापस लौट आई।

निर्णय

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने एक स्पष्ट निर्देश जारी किया: नाइआ/नलिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट में एक आवेदन दाखिल करेंगे, जिसमें शिक्षा तथा अन्य खर्चों के लिए आवश्यक सटीक राशि का उल्लेख होगा। इसके बाद हाई कोर्ट लगभग ₹6 करोड़ की शेष जमा राशि में से उपयुक्त रकम जारी करने का आदेश देगा।

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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल एक अंतरिम व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य बच्चे की शिक्षा का निरंतर समर्थन करना है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को मुख्य अपीलों का निपटारा “यथाशीघ्र, अधिमानतः तीन महीने के भीतर” करने के लिए कहा।

इसके साथ ही, पीठ ने अंतरिम अनुरोध का निस्तारण करते हुए बाकी मामलों को हाई कोर्ट के समक्ष छोड़ दिया।

Case Title: Udita Nabha vs. Ranjeet Nabha & Anr.

Case Number: SLP (C) No. 22367/2024

Case Type: Special Leave Petition (Civil)

Decision Date: 03 November 2025

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